शरद पूर्णिमा पर बुधवार को आसमान में चांद होगा तो नीचे धवल संगमरमरी शाहकार ताजमहल। दुनिया के सातवें अजूबे से मिलने के लिए रात 12 बजे के बाद चांद मानो उसके आंगन में उतर आएगा। चांदनी ओढ़े ताज की खूबसूरती उस दौरान और बढ़ जाएगी, जो साल में केवल इसी दिन नजर आती है। ताज के ऐसे अक्श को निहारने के लिए एक दिन पहले ही 250 सैलानियों ने टिकट बुक करा लिए हैं। ये सैलानी 30-30 मिनट के स्लॉट में ताज का दीदार कर सकेंगे।
इसलिए कहते हैं चमकी
सफेद संगमरमर से तामीर ताजमहल पर जब शरद पूर्णिमा पर चांद की दूधिया रोशनी पड़ती है तो इसका सौंदर्य और निखर उठता है। ताज की पच्चीकारी में रंगीन कीमती पत्थर लगे हैं जो चांद की रोशनी एक खास एंगल पर पड़ने पर चमकते हैं। इन नगीनों का चमकना ‘चमकी’ के नाम से चर्चित हो गया। वर्ष 1984 में ताजमहल के रात में बंद होने से पहले शरद पूर्णिमा पर पूरी रात चमकी का मेला लगता था, जो पांच नहीं बल्कि सात दिनों तक चलता था।