आगरा किला का मुसम्मन बुर्ज हो या शीश महल, मीना बाजार हो या रतन सिंह की हवेली। दीवान ए खास हो या मोती मस्जिद या फिर शिवाजी की कथित जेल। इतिहास के बंद झरोखों को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने बंद कर रखा है। ताजमहल के तहखाने के 20 कमरों को खोलने की मांग वाली याचिका के बाद ताजनगरी के पर्यटन उद्यमियों ने मांग उठाई है कि विरासतों को पर्यटकों के लिए खोला जाए। भले ही इसके लिए ताजमहल की तरह अतिरिक्त टिकट लगाया जाए। इससे पर्यटक अपनी धरोहरों को देख भी सकेंगे और बंद रहने के कारण स्मारकों को भी सीलन, रखरखान न होने से नुकसान भी नहीं होगा।
अमर उजाला ने पर्यटन उद्योग की इस मांग को पूर्व में उठाया, जिस पर संस्कृति मंत्रालय में कोरोना काल से पूर्व चर्चा भी हुई। अब फिर से पर्यटन उद्योग आकर्षण वाले स्मारकों को पर्यटकों के लिए खोलने की मांग दोहरा रहा है।