चार साल पहले 197 करोड़ रुपये की लागत से ताजमहल के आसपास दो किमी क्षेत्र की गलियों, सड़कों को लाल पत्थर संवारा गया और फुटपाथ से लेकर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी, ऑटोमैटिक बोलार्ड और बूम बैरियरों से सुरक्षा, टॉयलेट ब्लॉक, फायर हाइड्रेंट सिस्टम लगाया गया। लेकिन देखरेख न होने से एक ओर पत्थर टूट गए तो दूसरी ओर सीसीटीवी खराब पड़े हैं। अग्निशमन उपकरण काम नहीं कर रहे तो ग्रेनाइट के बने डस्टबिन गायब हो गए। पूरे प्रदेश के लिए मिसाल बने ताजगंज प्रोजेक्ट के पत्थर टूटकर बिखर रहे हैं।
कोरोना संक्रमण के कारण 61 दिनों की बंदी के बाद ताज पर्यटकों के लिए खुला और अब पर्यटकों की आवाजाही शुरू हुई है। इनर रिंग रोड से दोनों एक्सप्रेस वे के जरिए जो पर्यटक ताज देखने आ रहे हैं, उनकी नजर में ताजगंज का यह हिस्सा बदहाल है। यह क्षेत्र आगरा का आइना है। पूरे शहर की जगह पर्यटक केवल ताजगंज ही घूम पा रहे हैं। टूटे पत्थर, बंद लाइटें, उखड़ी सड़कों से ताजनगरी की छवि खराब हो रही है। ताजमहल से जुड़े गाइड, फोटोग्राफर, टूर ऑपरेटर और ताजगंज के दुकानदार पर्यटकों को इस बदहाली के कारण हो रही मुश्किलों को हर दिन देख रहे हैं।
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खराब पड़ा दमकल के लिए पानी सप्लाई का प्वाइंट
- फोटो : अमर उजाला
ट्रंप आए तो ताजगंज के पत्थर चमकाए
जनवरी 2020 में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जब ताजमहल देखने आए, तब ताजगंज प्रोजेक्ट का पत्थर-पत्थर चमकाया गया था। पूर्वी गेट नाले पर मोगरे के फूलों की माला और बंगलुरू से केमिकल मंगवाया गया था। उसी दौरान ताजगंज प्रोजेक्ट की टूट-फूट की मरम्मत और रंगरोगन किया गया था। इसके बाद डेढ़ साल से ताजमहल के पास एडीए ने कोई काम नहीं कराया। प्रदेश सरकार पहले ही ताजमहल के लिए कोई भी योजना नहीं चला रही।
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आगरा: ताजमहल के निकट टूटी हुई जाली
- फोटो : अमर उजाला
एडीए पर रखरखाव की जिम्मेदारी
राजकीय निर्माण निगम से ताजगंज प्रोजेक्ट को चार साल पहले आगरा विकास प्राधिकरण को हस्तांतरित कर दिया गया। एडीए ने हाल में ही 80 लाख रुपये इस प्रोजेक्ट की मरम्मत पर खर्च करने का दावा भी किया है, लेकिन यह मरम्मत किसी को नजर नहीं आ रही है।
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आगरा: ताजमहल के निकट लाइटों की टूटी हुई जाली
- फोटो : अमर उजाला
डेढ़ साल पथकर नहीं मिला
कोरोना संक्रमण के कारण ताजमहल बंद रहा तो पथकर भी नहीं मिल पाया है। ताजगंज प्रोजेक्ट की मरम्मत पथकर निधि से मिले धन से होती है। डेढ़ साल से यही नहीं मिला। इसी वजह से बजट की कमी के कारण मरम्मत नहीं हो पा रही। इस बार पथकर समिति में अनुरक्षण, मरम्मत का प्रस्ताव रखेंगे। एडीए की अपनी वित्तीय हालत भी ठीक नहीं है। - डॉ. राजेंद्र पैंसिया, उपाध्यक्ष, एडीए
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खंभे तक खराब सीसीटीवी कैमरा
- फोटो : अमर उजाला
पर्यटकों के लिए ताजगंज ही आगरा
अनलॉक में ताजमहल देखने के लिए ही पर्यटक आ रहे हैं। एक्सप्रेस वे से निकलते हुए दो से तीन घंटे आगरा में बिताकर पर्यटक जा रहे हैं। उनके लिए ताजगंज ही पूरा आगरा है, जो मेंटेनेंस न होने से बदहाल है। - शमशुद्दीन, अध्यक्ष, आगरा एप्रूव्ड गाइड एसोसिएशन
काम अच्छा पर मरम्मत भी न हुई
ताज के पास लाल पत्थर से अच्छा काम हुआ, लेकिन इसकी मरम्मत तक नहीं की जा रही। ये आम जनता के टैक्स के पैसे से बना है। मेंटेनेंस न होने से खराब हालत हो गई है। पर्यटकों में आगरा की खराब छवि पहुंच रही है। - प्रहलाद अग्रवाल, अध्यक्ष, आगरा टूरिस्ट वेलफेयर चैंबर
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महताब बाग से ताजमहल का नजारा
- फोटो : अमर उजाला
ताज के पास तो हालात सुधारिए
197 करोड़ रुपये खर्च किए तो सालाना ईमानदारी से एक करोड़ मरम्मत पर तो खर्च करिए। इसीलिए तो एडीए पथकर लेता है। कम से कम ताज के पास के हालात ही सुधार दीजिए। बाकी शहर तो पहले ही गड्ढों, धूल, जाम से बेहाल है। - संदीप अरोड़ा, अध्यक्ष, आगरा टूरिज्म डेवलपमेंट फाउंडेशन
ताजमहल के पास ये हैं खामियां
- दक्षिणी गेट पर थाना के सामने फर्श धंस गया, पत्थर उखड़े।
- पश्चिमी गेट पर नाले के स्लैब टूटकर गिरे, भूमिगत नाला खुला।
- नीम तिराहे पर कोबल स्टोन से बना रोड धंसा, कंक्रीट के पैबंद।
- अमरूद टीले से ताज तक पत्थर के लैंप पोस्ट के पत्थर टूटे।
- पूर्वी गेट पर पाठक प्रेस, अमर विलास रोड पर लैंप पोस्ट टूटकर गिरे।
- 40 फीसदी लैंप पोस्ट की लाइटें खराब, बोलार्ड लाइटें बंद और टूटीं।
- पूरे दो किमी क्षेत्र में ग्रेनाइट से बने डस्टबिन पहले साल ही टूटे।
- बोलार्ड और बूम बैरियर कार्यशील नहीं, ड्रिल में भी कारगर नहीं।
- टॉयलेट ब्लॉक की जालियां टूटकर गिरीं, सफाई खराब।
- पाथवे के पत्थर टूटे, डिवाइडर पर हरियाली देखरेख न होने से नष्ट।
- शिल्पग्राम से अमरूद टीला तक सीसीटीवी खराब होने से निगरानी नहीं।