ताजमहल के दिनभर के 5000 टिकट रविवार को सुबह 11:30 बजे ही बिक गए, जिसकी वजह से बड़ी संख्या में सैलानी मायूस लौटे। 4302 सैलानियों ने अजूबे का दीदार किया। अब सवाल यह है कि टिकट 5000 बिके तो 698 कहां चले गए? पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि लपके टिकट बुक कर लेते हैं और फिर ब्लैक करते हैं। जितने टिकट लपके नहीं बेच पाते, उतने ही सैलानी दीदार से महरूम रह जाते हैं। यह खेल कई बार पकड़ा जा चुका है। सुबह के स्लॉट में प्रवेश की अनुमति घटाने और शाम में बढ़ाने के बाद भी सैलानियों को राहत नहीं मिल पाई है।
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ताजमहल
- फोटो : अमर उजाला
शनिवार की तरह रविवार को भी 1500 टिकट का सुबह का स्लॉट सुबह 10:30 बजे तक और दोपहर का 3500 टिकट का स्लॉट पूर्वाह्न 11:20 बजे तक बुक हो गया। पूर्वाह्न 11:30 बजे के बाद ताजमहल पर पहुंचे सैलानियों को टिकट नहीं मिल पाए। ताजमहल में प्रवेश नहीं मिलने के कारण कई सैलानी महताब बाग पहुंचे। यहां से 679 सैलानियों ने ताजमहल का दीदार किया। यह संख्या सामान्य दिनों के मुकाबले तीन गुना है।
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ताजमहल आगरा
- फोटो : अमर उजाला
'दिल्ली से आठ घंटे में पहुंचे... मिली मायूसी'
दिल्ली से आए पर्यटक नीरज श्रीवास्तव ने बताया कि दिल्ली से आगरा तक लगभग हर टोल प्लाजा पर ट्रैफिक जाम मिला। किसान आंदोलन के कारण पुलिस सख्ती कर रही है। चार घंटे का रास्ता आठ घंटे में पूरा कर पाए। सुबह छह बजे चल दिए थे। ताज पहुंचे तो टिकट नहीं मिला। अब वापस जा रहे हैं, सिर्फ किला ही देख पाए।
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ताजमहल के बाहर पर्यटकों की कतार
- फोटो : अमर उजाला
'ऑनलाइन भी टिकट बुक नहीं हो पाया'
जयपुर के गांधी नगर से आए पर्यटक राजीव शर्मा ने कहा कि हम जयपुर से 12 बजे आगरा पहुंचे। गाइड से फोन पर बात हुई थी। उसने कहा था कि टिकट की टेंशन नहीं है, यह ऑनलाइन मिल जाता है। यहां आए तो पता चला कि रविवार के लिए टिकट ही नहीं है, ताज का दीदार नहीं हो पाया।
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ताजमहल में पर्यटक (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
'बार-बार नए ट्रायल की जरूरत नहीं'
होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश चौहान ने बताया कि बार-बार नए नए ट्रायल की जरूरत ही क्या है। 5 की जगह 15 हजार टिकट संख्या कर दी जाए तो सारे ट्रायल खत्म हो जाएंगे। जो सैलानी मायूस लौट रहे हैं, क्या वो दोबारा आएंगे। उनके मन में आगरा और ताज की छवि खराब हो रही है और सरकार को राजस्व नहीं मिल रहा।
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ताजमहल पर क्यूआर कोड स्कैन करते पर्यटक (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
'टिकट की संख्या क्यों नहीं बढ़ा रहे'
टूरिज्म गिल्ड के उपाध्यक्ष राजीव सक्सेना ने बताया कि ताज पर केवल शनिवार-रविवार को ही पर्यटक आ रहे हैं तो क्यों नहीं टिकट की संख्या बढ़ा रहे। ताज के क्षेत्रफल को देखते हुए संख्या तय कर दें ताकि सैलानियों को मायूस न लौटना पड़े। किसान आंदोलन के समय भी सैलानी आ रहे हैं पर ताज नहीं देख पा रहे, उनकी मनोस्थिति समझने का एएसआई प्रयास करे।