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ताजमहलः पर्यटकों पर पड़ रही महंगे टिकट की मार, सुविधाएं हो रही 'तार-तार'

Tue, 02 Jul 2019 02:10 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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ताजमहल पर बिना शू-कवर पहने भारतीय सैलानी - फोटो : अमर उजाला
ताजमहल पर विदेशी सैलानियों को मुख्य गुंबद पर जाने के लिए शू- कवर दिया जा रहा है, लेकिन जनाब, हिंदुस्तानी सैलानियों के पांव भी ऐसी तपती दोपहरी और लू में जल रहे हैं। पथकर निधि से इन्हीं सैलानियों की जेब से आगरा विकास प्राधिकरण सालाना 54 करोड़ रुपये वसूल रहा है, लेकिन विदेशी और भारतीय सैलानियों के बीच भेदभाव करते हुए केवल विदेशी को ही शू-कवर देता है। बजट की कमी बताकर एक तरफ भारतीय सैलानियों को शू-कवर मयस्सर नहीं, वहीं अफसरों के लिए इसी पथकर निधि से एसी कारें खरीदी गई हैं।
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बिना शू कवर के ताज के गुंबद पर घूमते पर्यटक - फोटो : अमर उजाला
आगरा विकास प्राधिकरण (एडीए) ने ताजमहल के मुख्य गुंबद पर मेहमानखाने के नीचे दो शूकवर वेंडिंग यूनिट लगाई है, जहां केवल विदेशी पर्यटकों को शू-कवर मिल रहे हैं। भारतीय सैलानियों को नंगे पांव ही जाना पड़ रहा है या फिर वह ताज के बाहर से 20 रुपये में यह शू कवर साथ खरीदकर लाएं। सबसे अच्छी क्वालिटी का शू कवर महज पांच रुपये का पड़ रहा है।
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ताजमहल पर पर्यटक - फोटो : अमर उजाला
गौरतलब है कि हर साल आगरा विकास प्राधिकरण 54 करोड़ रुपये पथकर वसूल रहा है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण को 104 करोड़ रुपये की धनराशि हर वर्ष प्राप्त हो रही है। जानकार बताते हैं कि महज पांच रुपये की लागत में सबसे अच्छे शू कवर आ सकते हैं। जबकि ताजमहल के मुख्य गुंबद को देखने के लिए अब 200 रुपये का टिकट लेना पड़ता है।

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ताजमहल पर बिना शू-कवर पहने भारतीय सैलानी - फोटो : अमर उजाला
वसंत कुमार स्वर्णकार, अधीक्षण पुरातत्वविद, का कहना है कि ताजमहल के साइट मैनेजमेंट प्लान में पर्यटकों को शूकवर पहनाकर मुख्य गुंबद पर जाने की सिफारिश की गई है। अभी तक भारतीय पर्यटकों के लिए शू क वर की व्यवस्था नहीं है। यह प्लान सुप्रीम कोर्ट में पेश हो चुका है। मुख्यालय से जो निर्देश आएंगे, उसके मुताबिक शूकवर की व्यवस्था की जाएगी।
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ताजमहल पर बिना शू-कवर पहने सैलानी - फोटो : अमर उजाला
राकेश चौहान, सदस्य, पथकर कमेटी का कहना है कि भारतीय और विदेशी पर्यटक में भेदभाव क्यों ? हम हर बार ताज आने वाले पर्यटक को ब्रोशर और शू कवर मुफ्त देने की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन इसके लिए बजट जारी नहीं करते। सैलानी ऐसी तपती दोपहरी में नंगे पैर ताजमहल का दीदार कर रहे हैं या फिर गुंबद तक जूते पहनकर जा रहे हैं।
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