ताजमहल का शहर आगरा स्वच्छ सर्वेक्षण-2022 में पिछड़ गया है। नगर निगम आगरा के एयर कंडीशंड कमरों में बैठे रहने वाले अधिकारियों की लापरवाही ने स्वच्छ सर्वेक्षण-2022 में टॉप-10 शहरों में आने के सपने को चूर-चूर कर दिया। शनिवार को शहरी विकास मंत्रालय की ओर से जारी की गई स्वच्छ सर्वे की रैंकिंग में आगरा को 23 वां स्थान मिला है। प्रदेश में आगरा छठवीं रैंक पर रहा, जबकि बीते साल तीसरे और उससे पहले दूसरे नंबर पर था।
मेरठ, प्रयागराज, लखनऊ और वाराणसी जैसे शहरों ने आगरा को इस बार बुरी तरह से पछाड़ दिया, जबकि नगर निगम के अफसर टॉप-10 में रैंक दिलाने का सपना दिखाते रहे। पार्षदों का कहना है कि कागजों पर फर्जी रिपोर्ट पेश की गईं। रैंकिंग के बाद पार्षदों ने नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
सफाई में दो साल से लुढ़क रहा आगरा
साल देश में रैंकिंग प्रदेश में रैंक
2022 23 06
2021 24 03
2020 16 02
2019 85 -
2018 102 -
2017 263 -
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सड़क पर बिखरा कूड़ा
- फोटो : अमर उजाला
सड़कों से कूड़ा उठा न डलाबघर हटे
बीते साल जब आगरा 16 वीं रैंक से लुढ़ककर 24 वीं रैंक पर आया और प्रदेश में दूसरे नंबर पर था, तब निगम के अफसरों ने जून तक डलाबघर हटाने के दावे किए थे। सड़कों के किनारे से नगर निगम न तो कूड़ा हटा सका न डलाबघर ही खत्म कर सका। आगरा किला, ताजमहल, एत्माद्दौला, सिकंदरा जैसे स्मारकों के पास कचरे के ढेर देखकर पर्यटक भी मुंह पर रूमाल रखने के लिए मजबूर हो गए। हाल में ही ताजमहल के पास स्थानीय निवासी ने डलाबघर से कूड़ा न उठाने पर आत्मदाह की धमकी दी थी, जो पूरे देश में आगरा की सफाई व्यवस्था की पोल खोल गई।
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डस्टबिन
- फोटो : अमर उजाला
कतरनों का निस्तारण नहीं हो सका
इंदौर नगर निगम को आईएएस मनीष सिंह ने दो साल के अंदर ही देश के सबसे स्वच्छ शहरों में शुमार कर दिया। नगर निगम में दो साल से आईएएस निखिल टी फुंडे तैनात हैं। इन दो सालों में उनके कार्यकाल के दौरान आगरा नगर निगम की रैंकिंग खराब हुई। प्रदेश में दूसरी रैंक से आगरा छठवीं पर आ गया, जबकि ताजमहल के शहर को अव्वल लाने के दावे किए गए थे। चमड़े की कतरनों और कच्चे पेठे की गंदगी को दूर करने के लिए कंपनियों से रिपोर्ट मांगी गई, पर अमल नहीं कर पाए। चमड़े की कतरनों के निस्तारण और री-साइकिल की व्यवस्था नहीं हुई, जिससे शहर के नाले और सड़कों के किनारे कतरनों के बैग नजर आते रहे।
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डस्टबिन
- फोटो : अमर उजाला
18 करोड़ रुपये निगहबानी, 14 करोड़ डस्टबिन में बर्बाद
नगर निगम ने स्मार्ट मॉनीटरिंग के लिए 18 करोड़ रुपये से चिप, सेंसर और जीपीएस लगवाए ताकि डलाबघर, डस्टबिन और कूड़ा लेने वाली गाड़ियों की निगरानी की जा सके, पर व्यवस्था कारगर नहीं हो पाई। इसी तरह 14 करोड़ रुपये घरों में डस्टबिन देने में खर्च किए गए, पर न सूखा कचरा अलग हुआ न गीला। डस्टबिन में सेंसर लगाने और घरों के बाहर आरएफआईडी टैग लगाए गए, पर वह भी मॉनीटरिंग के काम नहीं आए। एक माह में ही वह खराब हो गए।
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डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन हुआ बंद
- फोटो : अमर उजाला
दो महीने से बंद पड़ा डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन
नगर निगम ने शहर में डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन की जिम्मेदारी स्वच्छता कॉरपोरेशन को दी, जबकि ताजगंज के पास लॉयन सर्विसेज को, वहीं मल्टीस्टोरी इमारतों में नेशन वाइड कंपनी से करार किया। दो माह से स्वच्छता कॉरपोरेशन ने बहुमंजिला इमारतों से कूड़ा उठाना बंद कर दिया तो लोगों ने सड़कों पर कचरा डालना शुरू कर दिया। नेशन वाइड कंपनी के पास वाहन न होने के कारण कूड़ा उठाया नहीं जा रहा।
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सड़क किनारे पड़ी गंदगी
- फोटो : अमर उजाला
अमर उजाला ने सफाई में लापरवाही पर लगातार चेताया
अमर उजाला ने शहर की सफाई व्यवस्था में आई गिरावट पर लगातार चेताया। डोर-टू-डोर व्यवस्था ठप रहने के साथ ट्रांसफर स्टेशन बंद होने, कचरा डंपिंग साइट की जगह शहर में ही खपाने और डलाबघरों पर कचरा जलाकर निस्तारित करने के मामलों को लगातार प्रकाशित किया, लेकिन नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी नगर आयुक्त और मेयर को फर्जी रिपोर्ट देते रहे। इसका खामियाजा रैकिंग में गिरावट के रूप में सामने आ गया।
मेयर आगरा नवीन जैन ने बताया कि यह लापरवाही का नतीजा है। दूसरे शहरों ने हमसे बेहतर सफाई की और आगे बढ़े, पर हम मॉनीटरिंग न होने से रैंक सुधार नहीं सके। इस बार कोशिश पूरी होगी कि जनवरी के सर्वेक्षण में हम बेहतर कर पाएं। इस सप्ताह सफाई को लेकर बैठक करेंगे।