हिंदी विषय की उत्तर पुस्तिका में लिखी गुहार
यूपी बोर्ड में शिक्षा का क्या स्तर है, इसकी पोल उत्तर पुस्तिकाएं खोल रही हैं। हाईस्कूल-इंटरमीडिएट के विद्यार्थी हिंदी तक नहीं लिख पा रहे। मूल्यांकन के दौरान यूपी बोर्ड परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं में जो कुछ भी सामने आ रहा है, उसे पढ़कर शिक्षक भी हैरान हैं।
सोमवार को हाईस्कूल हिंदी विषय की उत्तर पुस्तिका में ऐसा ही लिखा पाया गया। उत्तर पुस्तिका में एक छात्रा ने परीक्षक से अपनी मजबूरी लिखकर पास करने की गुहार लिखी है। हालत यह है कि 16 लाइन में 37 गलतियां हैं।
आगरा में एक सेंटर पर हाईस्कूल हिंदी की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया गया। इसमें से कई उत्तर पुस्तिकाओं में पास करने की गुहार लिखी हैं। इनमें एक छात्रा की कॉपी है, जिसमें उसने 16 लाइन में अपनी मजबूरी का हवाला लिखकर परीक्षक से पास करने की अपील की है।
खुद बताया बेहद गरीब
छात्रा ने लिखा है कि वो बेहद गरीब घर की लड़की है और उसे परीक्षक पास कर दें। छात्रा के ज्ञान का स्तर ऐसा कि वो नहीं, मजबूरी, मजाक, सॉरी तक सही नहीं लिख पाई है। मजाक को मझाक, सॉरी को सोरी, मजबूर को मजबू लिखा है।
इस छात्रा ने उत्तर पुस्तिका में जितने भी प्रश्नों का जवाब लिखा है, सभी में यही हाल है। उत्तर पुस्तिका देखकर परीक्षक ने भी माथा पकड़ लिया। परीक्षक का कहना है कि अधिकांश परीक्षार्थियों की उत्तर पुस्तिका में हिंदी गलत पाई जा रही है। रोजमर्रा में उपयोग होने वाले आसान शब्द तक गलत पाए गए हैं।
बता दें कि इस बार सख्ती के चलते कई छात्रों ने यूपी बोर्ड की परीक्षा छोड़ दी थी। अब इस सख्ती का असर उत्तर पुस्तिकाओं में देखने को मिल रहा है। परीक्षा के सवालों के जवाब की बजाय कुछ छात्र-छात्राओं ने अजब-गजब गुहारें लिखी हैं। यह हाल आगरा में नहीं फिरोजाबाद और मैनपुरी में भी है।