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तस्वीरें: जनक दुलारी की विदाई पर भावुक हुई मिथिला नगरी, लगे प्रभु राम के जयकारे

Mon, 08 Oct 2018 01:10 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
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जनकपुरी आयोजन। - फोटो : अमर उजाला
आगरा में जनकपुरी में पिछले तीन दिन से उल्लास, उमंग का माहौल था। रविवार रात को वह वक्त भी गया, जब वातावरण विरह की वेदना से भर गया। राजा जनक के महलों को छोड़कर उनकी लाडली अयोध्या की राजरानी बनने की राह पर निकल पड़ी।

जनक दुलारी ने उस आंगन, उपवन को जी भरकर निहारा, जहां वे सखियों के साथ खेलती थीं। सखियों का रो-रोकर बुरा हाल था। जनकपुरी वासियों ने लाडली को नम आंखों से विदाई दी।
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जनकपुरी से सीता जी की विदाई। - फोटो : अमर उजाला
जनक महल पर कार्यक्रमों की शुरूआत भजन संध्या से हुई। चंचल उपाध्याय ने अपने भजनों से माहौल को भक्तिमय कर दिया। इसी बीच भगवान श्रीराम के स्वरूप और उनके तीनों लघु भ्राता, माता जानकी, राजा जनक (दीपक गोयल) रानी सुनयना (ममता गोयल) मंच पर पहुंचे।
 
भगवान राम की आरती कैबिनेट मंत्री एसपी सिंह बघेल, राजा जनक, रानी सुनयना भाजपा जिलाध्यक्ष श्याम भदौरिया, विधायक जगन प्रसाद गर्ग, डॉ. डीसी गोयल, महेश चंद शर्मा, समीर चतुर्वेदी, छोटे लाल बंसल आदि ने की।
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जनकपुरी महोत्सव - फोटो : अमर उजाला
हे राजा राम तेरी आरती गाऊं... के स्वर जैसे ही गूंजे। पूरे परिसर में लोगों ने खड़े होकर प्रभु राम का अभिवादन किया। 

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जनकपुरी से सीता जी की विदाई। - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद रामलीला कमेटी का स्वागत किया गया। भगवान राम ने भक्तों को आशीर्वाद दिया इसके बाद विदाई की आरती हुई, जिसमें कैबिनेट मंत्री एसपी सिंह बघेल, श्याम भदौरिया के साथ रामलीला कमेटी के समस्त पदाधिकारियों ने भगवान की आरती की।

इसके बाद प्रभु राम और माता जानकी की आरती के बाद वह विदाई आ गई, जब जनक दुलारी अपनी सखी, सहेलियों को छोड़कर अयोध्या के प्रस्थान कर गईं।
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जनकपुरी महोत्सव - फोटो : अमर उजाला
चारों राजकुमार घोड़ों पर सवार थे। पीछे माता जानकी का रथ चल रहा था। मुख्य मंच से शोभायात्रा राजा जनक के निवास पर पहुंची और वहां सभी रीति रिवाजों को पूरा कर जानकी अयोध्या को लिए विदा हो गई। 
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सच्चा लोकतंत्र तो राम के राज में था: बघेल

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जनकपुरी महोत्सव - फोटो : अमर उजाला
भगवान आरती के बाद श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कैबिनेट मंत्री प्रोफेसर एसपी सिंह बघेल ने कहा कि आगरा का यह आयोजन अनूठा है। ऐसा आयोजन देशभर में कहीं नहीं होता है। 

उन्होंने कहा यह आयोजन होता है और इतनी बड़ी संख्या में लोग आते हैं। इसी हमारी विरासत आगे की पीढ़ी तक पहुंचती है। कहा कि सच्चा लोकतंत्र तो भगवान राम के राज में था। सभी की बात सुनी जाती थी। तभी तो समाज के निचले के पायदान के एक व्यक्ति की बात सुनकर मर्यादा पुरुषोत्तम ने अपनी पत्नी सीता को वनवास दे दिया। 

हम कुछ ही दिनों की आचार संहिता में परेशान हो जाते हैं। राम ने तो जीवन भर आचार संहिता का पालन किया। उन्होंने कहा कि धार्मिक व्यक्ति संवेदनशील होता है। यदि सभी नेता, अधिकारी धार्मिक हो जाएं और संवेदनशील होकर न्याय करें तो देश को फिर से विश्व गुरू होने से कोई नहीं रोक सकता है। 
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