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वाद-विवाद प्रतियोगिता: 'संघवाद' के समर्थन में मुखर हुए युवा तर्क, वक्ताओं ने रखीं अपनी-अपनी दलीलें

Sun, 12 Jan 2020 01:39 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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वाद-विवाद प्रतियोगिता के प्रतिभागी - फोटो : अमर उजाला
आगरा के बैकुंठी देवी कन्या महाविद्यालय में शनिवार को श्री मुरारीलाल माहेश्वरी स्मृति राष्ट्रीय वाद-विवाद प्रतियोगिता हुई। इसमें प्रतिभागियों ने 'संघवाद सशक्त राष्ट्र के लिए अनिवार्य' विषय पर बेहतर प्रस्तुतीकरण के साथ अपने-अपने तर्क दिए। राज्य स्तरीय विजेता वाराणसी के सनबीम कॉलेज की बीए अंतिम वर्ष की छात्रा यशस्विनी शुक्ला ने संघवाद के पक्ष में कहा कि लोकतंत्र में राज्य और केंद्र के सह अस्तित्व के साथ यह एकता और अखंडता को बढ़ावा दे रही है। लोकतंत्र इससे जीवंत है।

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छात्रा यशस्विनी शुक्ला - फोटो : अमर उजाला
यशस्विनी ने कहा कि सत्ता का विकेंद्रीकरण संघवाद की पहचान है। इस प्रणाली में कोई भी सरकार निरंकुश नहीं हो सकती। विविधता भरे राज्यों को 21 वीं सदीं की मुश्किलों के सामने संघवाद ही एक रख सकता है। राष्ट्र की एकता और अखंडता संघवाद में समाहित है। केंद्र सरकार जहां रक्षा और विदेश नीति पर ध्यान देकर राष्ट्र का सम्मान दुनिया में बढ़ाती है, वहीं प्रांत की सरकारों की जिम्मेदारी है कि वो लोगों की बुनियादी सुविधाओं को बढ़ाएं और छोटी छोटी समस्याओं को दूर करें।
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लखनऊ की छात्रा प्रज्ञा शुक्ला - फोटो : अमर उजाला
दूसरे स्थान पर लखनऊ मंडल की प्रज्ञा शुक्ला ने कहा कि राज्यों के अधिकार बरकरार रखते हुए हम एक साथ चलते हैं। संघवाद में अलग अलग समूह के लोग एक ही काम के लिए जुटते हैं। तमाम भिन्नताओं के बाद भी यह व्यवस्था हम सभी को एक किए हुए हैं। संघवाद एक अनुबंध है, यूएसए, कनाडा और भारत में यह व्यवस्था है। भारत में तमाम भिन्नता होते हुए ही इसने सभी राज्यों को मोती की माला की तरह पिरो रखा है। सर्वजन हिताय की भावना से संघवाद काम करता है। संघवाद सम्मान और विश्वास को कायम रखता है।

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सैयदा हिजाब - फोटो : अमर उजाला
क्षेत्रवाद, जातिवाद बढ़ा तो भारत सोवियत संघ की तरह बंट जाएगा : सैयदा
तीसरे स्थान पर रहीं मेरठ मंडल की सैयदा हिजाब जैदी ने कहा कि महात्मा गांधी, जवाहर लाल नेहरू, सरदार वल्लभ भाई पटेल समेत देश के महापुरुषों ने सशक्त देश का सपना देखा था। हम सभी देश को मजबूत करने के लिए व्याकुल हैं लेकिन ये संघवाद से ही मुमकिन है। अगर क्षेत्रवाद, जातिवाद को बढ़ावा मिला तो भारत सोवियत संघ की तरह बंट जाएगा। एकता के धागे में पिरोने के साथ साथ संघवाद वैश्विक स्तर पर देश को मजबूत कर रहा है। केंद्र की सरकार देश के लिए विदेश में अच्छा काम कर रही है तो राज्य की सरकारें विकास की गति को बढ़ावा दे रही हैं।
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आगरा की छात्रा जूही तिवारी - फोटो : अमर उजाला
पाक, चीन का खतरा देखते हुए संघवाद जरूरी - जूही
सांत्वना पुरस्कार पाने वाली आगरा के बैकुंठी देवी कन्या महाविद्यालय की जूही तिवारी ने कहा कि देश को मजबूत और क्षेत्र के विकास के लिए संघवाद की दोहरी सरकार प्रणाली जरूरी है। हमारे देश में 68 फीसदी लोग गांव में रहते हैं। संघवाद के कारण ही स्थानीय सरकारें स्वतंत्रतापूर्वक काम करने का अधिकार पा सकीं। आजादी से पहले भुखमरी थी, आज देश दुनिया की पांचवी अर्थव्यवस्था है। संघवाद ने तरक्की को रफ्तार दी है। हर राज्य की अलग अलग समस्याएं हैं। कश्मीर के मुद्दे अलग हैं, तो झारखंड की अलग समस्याएं हैं। एक तरफ चीन, दूसरी तरफ पाकिस्तान के खतरे को जवाब देने के लिए संघवाद जरूरी है।
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प्रयागराज की छात्रा जोशिका मुखर्जी - फोटो : अमर उजाला
संघवाद से ही बनी है विभिन्नता में एकता - जोशिका मुखर्जी
सांत्वना पुरस्कार पाने वाली प्रयागराज की जोशिका मुखर्जी ने कहा कि देश की एकता के लिए संघवाद अनिवार्य है। इसी से विभिन्नता में एकता बनी हुई है। केंद्र और राज्य एक दूसरे की शक्तियों और अधिकारों का हनन नहीं कर सकते है। दोनों के अपने अलग अलग क्षेत्र और शक्तियां हैं जिन्हें संविधान ने तय किया है। विविधता को खत्म करके बाध्यकारी एकता नहीं की जा सकती है।
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