दक्षिण भारतीय शैली में बनाए गए रंगनाथ मंदिर में दस दिवसीय उत्सव चल रह था। बृहस्पतिवार को धार्मिक अनुष्ठानों के साथ कार्यक्रम का समापन हो गया। बैकुंठ एकादशी से शुरू हुए उत्सव में भगवान रंगनाथ ने शठ कोप स्वामी जी को अपने विभिन्न स्वरूपों के दर्शन कराए।
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भगवान रंगनाथ और गोदाम्मा जी के विग्रह
- फोटो : अमर उजाला
इस दौरान भगवान कभी राम रूप में नजर आए तो कभी कृष्ण रूप में दिखाई दिए। उत्सव का अंतिम दिन बहुत ही मार्मिक और भावुक रहा। दस दिनों बाद श्री शठ कोप स्वामीजी नम्मलवार को शरणागति या मोक्ष प्राप्ति होती है।
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माता गोदाम्मा का विवाहोत्सव संपन्न
- फोटो : अमर उजाला
कहते हैं कि बैकुंठ एकादशी के दिन भगवान श्री शठ कोप स्वामीजी को बैकुंठ तो ले जाते हैं पर भगवान को स्वयं स्वामीजी के श्री मुख से उनके द्वारा रचित तिरुवायमोरि के 1102 पद सुनने थे। इसलिए 10 दिन नित्य प्रति वे उनसे 100 पद सुनते हैं। अंत में उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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रंगनाथ मंदिर में बैकुंठ उत्सव
- फोटो : अमर उजाला
इसी भाव से श्री रंगनाथ मंदिर में दसों दिन 100 पदों का नित्य दिन पाठ हुआ। शाम को भगवान विभिन्न रूपों में शठ कोप स्वामीजी को दर्शन देते रहे।