सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ताजमहल के साए तले रहने वाले हजारों लोग बेचैन हैं। हर गली, मोहल्ले, नुक्कड़ पर चाय की चुस्कियों के बीच चर्चा का एक ही विषय है कि ताजमहल के 500 मीटर दायरे में व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक का असर क्या होगा। क्या उनकी दुकान बचेगी या बंद होगी। 50 साल पुराना शोरूम बंद होगा या होटल पर ताला लगेगा। सवाल कई हैं, जितने लोग, उतनी बातें, लेकिन मायूस मन और बेचैनी के साथ हर कोई अपने अपने हिसाब से सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अर्थ निकालने में लगा है। उस वक्त को भी याद कर रहे हैं, जब कभी ताजमहल के अंदर दुकानें सजती थीं।
वर्ष 1984 से पहले चमकी का मेला शरद पूर्णिमा को लगता था। तब ताजमहल के अंदर लाखों लोगों की रात में मौजूदगी के कारण अंदर ही दुकानें लगती थीं। ताज के फोरकोर्ट में बने कमरों में स्थायी दुकानें थीं, जबकि पार्क में बल्लियों और कपड़ों से अस्थाई दुकानें लगाई जाती थीं। सुरक्षा कारणों की वजह इन्हें वहां से हटा दिया गया। जानिए कब क्या हुआ ?