सांप्रदायिक हिंसा से चार दिन घरों कैद में रही शहर की जिंदगी मंगलवार को न केवल बाहर निकली, बल्कि चल भी पड़ी। बाजार खुले, चहल पहल रही। स्कूलों में बच्चे पहुंचे, पढ़ाई भी हुई। बैंकों में भी कामकाज सामान्य हो गया। पुलिस ने पूरे बाजार में पहरा लगाया। फ्लैग मार्च से लोगों को भरोसा दिया कि कुछ गड़बड़ नहीं होगा।
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बाजार में रौनक लौटी
- फोटो : अमर उजाला
दुकानदारों ने दुकानें खोल दीं। सभी बाजारों में रौनक लौट आई। सुबह बाजार सुनसान रहे लेकिन दोपहर तक चहल पहल हो गई थी। शाम तक बाजार खुले। स्कूल भी खुल गए। इनमें काफी हाजिरी रही। परिषदीय स्कूल कम ही खुले। कांवेट स्कूलों में ज्यादातर में छुट्टी रही। कई स्कूलों ने पहले ही 31 तक की छुट्टी कर रखी है। माध्यमिक के विद्यालय और डिग्री कॉलेजों में पढ़ाई हुई
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दुकानें खुली रहीं
- फोटो : अमर उजाला
उधर, रोडवेज बस अड्डे से बसों का संचालन शुरू हो गया। नदरई गेट की पचास फीसदी दुकानें खुलीं। आभूषणों और बर्तन की दुकानें बंद रहीं। परचून और सब्जी की दुकानों पर भीड़ रही। सोरों गेट पर लगभग 600 दुकानें हैं। 300 दुकानें खुलीं। इतनी ही बंद रहीं। मेडिकल स्टोर पर भीड़ रही। पूरे बाजार में पुलिस तैनात रही।
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बच्चों ने खरीदी पतंग
- फोटो : अमर उजाला
वहीं बिलराम गेट पर लगभग 800 दुकानें हैं। साठ फीसदी खुलीं। चहल पहल रही। देर शाम तक बाजार खुला रहा। पुलिस गश्त करती रही। सहाबर गेट की 400 दुकानें में से ज्यादातर खुली रहीं। यहां भी पुलिस तैनात रही। परचून की दुकान और आटा चक्की पर भीड़ रही। घी मार्केट में भी काफी लोग रहे।
गणतंत्र दिवस पर हिंसा के बाद ही इंटरनेट सेवा बंद करा दी गई थी। चार दिन लोग बहुत परेशान रहे। न एटीएम काम कर रहे थे, न ही बैंकों में कामकाज हो रहा था। पैसे की किल्लत हो गई थी कई लोगों को। सोशल मीडिया पर हाय हैलो तक बंद हो गई थी। पांचवे दिन सोशल मीडिया भी चहका। मैसेज इधर से उधर और उधर से इधर चले। बाहर के लोगों को भी सोशल मीडिया से यहां का हाल बताया।