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सावन में बंद रहेंगे शिवालय, नहीं लगेंगे मेले और परिक्रमा, धार्मिक गतिविधियों पर प्रतिबंध रहेगा जारी

Fri, 26 Jun 2020 12:38 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

  • श्रद्धालुओं के लिए मंदिरों के पट नहीं खोले जाएंगे
  • कांवड़ यात्रा भी नहीं होगी
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मनकामेश्वर मंदिर - फोटो : अमर उजाला
आगरा में श्रावण मास में सभी शिवालय बंद रहेंगे। न सोमवार की परिक्रमा होगी, न श्रद्धालुओं के लिए मंदिरों के पट खुलेंगे, कोई मेला व अन्य धार्मिक आयोजन भी नहीं होगा। बुधवार को जिला प्रशासन और शिव मंदिरों के महंतों की बैठक में इस पर सहमति बन गई है। 
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कैलाश मंदिर आगरा - फोटो : अमर उजाला
कोरोना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए न मेले आयोजित होंगे। न अन्य समारोह व सामूहिक धार्मिक गतिविधियां होंगी। सभी मंदिरों में महंत व पुजारी पूर्व की भांति पूजा-पाठ व सफाई आदि कार्य कर सकेंगे।
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कैलाश मंदिर मेला का उद्घाटन (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
मंदिरों में सामाजिक दूरी का पालन संभव नहीं। ऐसे में समस्या बढ़ सकती है। सभी मंदिरों के महंतों ने श्रावण मास में दर्शनार्थियों के लिए पट बंद रखने पर सहमति जताई है। कावड़ परिक्रमा पर भी इस बार रोक रहेगी।

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मनकामेश्वर मंदिर
इतिहास में पहली बार नहीं होगी परिक्रमा: योगेश पुरी

मनकामेश्वर मंदिर के महंत योगेश पुरी ने कहा कि इतिहास में यह पहला मौका है जब सावन की परिक्रमा नहीं होगी। यह परिक्रमा शहर की समृद्धि और लोगों के स्वास्थ्य के लिए की जाती है। इस बार संक्रमण से बचाव को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। मंदिर में पूजा-पाठ यथावत चलता रहेगा। श्रद्धालु बाबा मनकामेश्वर के ऑनलाइन दर्शन कर रहे हैं। ये जारी रहेंगे।
 
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कैलाश मंदिर - फोटो : अमर उजाला
श्रद्धालुओं का संक्रमण से बचना जरूरी है : गौरव गिरी

कैलाश मंदिर के महंत गौरव गिरी ने बताया कि संक्रमण के कारण यह निर्णय हुआ है। इस पर सभी ने सहमति दी। श्रद्धालुओं को संक्रमण से बचाना भी जरूरी है। मंदिर में पूजा पाठ चल रहा है। पुजारी बाबा की आरती कर रहे हैं। प्रार्थना की जा रही है कि शहर कोरोना से मुक्त हो और जल्द से जल्द श्रद्धालु भोले बाबा के दर्शन कर पाएं।
 
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सावन में परिक्रमा करने उमड़े भक्त (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
मुगल काल से पहले शुरू हुई थी परिक्रमा
शहर में सावन की परिक्रमा मुगलकाल से पहले राजपूतों के शासन में शुरू हुई थी, शहर के चारों कोनों पर मंदिर हैं, इसलिए सावन के पावन दिनों में लोगों ने चारों मंदिरों में अभिषेक के लिए परिक्रमा शुरू की थी। अकबर के शासनकाल में राजा मान सिंह ने इसे प्रश्रय दिया। मुगलों के बाद मराठा आए तब परिक्रमा ने गति पकड़ी। 1940 में महामना मदन मोहन मालवीय शहर में आए थे, तब परिक्रमा ने भव्य रूप लिया। ( जैसा इतिहासकार सुगम आनंद ने बताया )
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