वृंदावन में ठंड का प्रभाव लाड़ले ठाकुर बांकेबिहारी महाराज पर न पड़े इसके लिए सेवायतों द्वारा आराध्य को गर्म पोशाक पहनाने के साथ ही साथ तप्तपदार्थों का भोग निवेदित किया जा रहा है। मेवा का भोग लगाया जा रहा है। चंदन के टीके, भोग और माखन-मिश्री में केसर मिलाया जा रहा है।
मंदिर के सेवायत प्रह्लाद वल्लभ गोस्वामी का कहना है कि ठाकुर बांकेबिहारी महाराज की बाल रूप सेवा हैं। बिहारीजी को पशमीनी शाल धारण कराकर ऊपर से गर्म कपड़ों की पोशाक पहनाई जा रही है। शयन शैया पर भी हल्के सूती चादर, गद्दों का स्थान अब शैमल की रुई के शनील चढ़े गद्दों, सात तकियों और रजाई ने ले लिया है। प्रात: काल 8 बजे शृंगार भोग में केसर मिश्रित मूंग की दाल का हलवा, माखन-मिश्री निवेदित किया जा रहा है। केसर, काजू, किसमिस, चिरोंजी, पिश्ता, बादाम, अखरोट इत्यादि मेवाओं का प्रयोग खाद्य पदार्थों में होने लगा है।
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