घर का दरवाजा अंजान लोगों के लिए नहीं खोलना चाहिए। अगर, कोई दरवाजा खटखटाकर बाहर बुलाए तो अंदर से चेहरा देखें। परिवार का व्यक्ति होने और जानकार होने पर ही दरवाजा खोलें। माता-पिता नहीं हैं तो घर से बाहर नहीं निकलें। बदमाश आ जाएं तो डरें नहीं, हिम्मत से मुकाबला करें। मौका पाकर घर से बाहर निकलकर शोर मचाएं। पुलिस को कॉल कर दें। आगरा में सात साल की अवनी को पापा उर्वेश कुमार, दादा राजेंद्र सिंह-बृजेंद्र सिंह और बुआ निशा ने यही सिखाया है। तभी तो उसने अपने घर को लुटने से बचा लिया।
अवनी एयरफोर्स स्कूल में कक्षा तीन में पढ़ती हैं। उसके चाचा जितेंद्र कुमार ने बताया कि सेना और पुलिस में परिवार के लोग हैं। उर्वेश कुमार (अवनी के पिता) बीएसएफ में हैं। बीकानेर में तैनात हैं। दादा राजेंद्र सिंह सीआरपीएफ में हवलदार थे। वह नक्सल प्रभावित इलाके में रहे थे। बाद में नौकरी छोड़ दी थी। घर के पास ही रहने वाले दूसरे दादा पीएसओ हैं। वहीं बुआ निशा सिपाही हैं।