तीज़ड़ी माता की पूजा अर्चना करतीं वृद्ध महिला।
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व्रत की कहानी में सात भाईयों के एक बहन होती है। शादी के बाद वह तीजड़ी माता का व्रत रखती है। भाई उसे झूठा चंद्रमा बनाकर दिखाते है और बहन का व्रत खुलवा देते हैं। व्रत अधूरा करने पर तीजड़ी माता बहन के पति के प्राण ले लेती है। बहन को भाईयों के झूठ का पता चलता है और फिर वह एक साल तक पति के शव के साथ रहती है और पूरी निष्ठा भाव से माता का व्रत रख पति की दीर्घायु का वरदान प्राप्त करतीं है। वहीं उन्हाेंने तीजड़ी माता को झूला झुलाने का महत्व बताते हुए कहा पांच अनाज के अंकुरित दानों से उगी हुई धूप से तीजड़ी माता बनाई जाती है। माता को झूला झुलाकर महिलाएं मंगल गीत गातीं हैं। जिससे माता खुश हो जाती है। फिर उसी झूले पर महिलाएं झूलतीं हैं।