बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में फिरोज खान को संस्कृत का प्रोफेसर बनाने का विवाद भले ही सुर्खियों में हो, लेकिन सुलहकुल की नगरी के मदरसा मुईनुल इस्लाम में बच्चों को साढ़े तीन साल से संस्कृत पढ़ाई जा रही है। मदरसे के शिक्षक मुश्ताक हाशमी और शारिक मलिक बच्चों को संस्कृत के श्लोक कंठस्थ कराते हैं।
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मदरसे में बच्चे
- फोटो : अमर उजाला
शाहगंज के दौरेठा में स्थित मदरसा मुईनुल इस्लाम पहले मंटोला में संचालित होता था, तब इसमें मुस्लिम बच्चे ही तालीम हासिल करने को दाखिला लेते थे। वर्ष 2005 में मदरसे को शाहगंज स्थानांतरित किया गया तो यहां हिंदू छात्र-छात्राओं ने भी दाखिला लेना शुरू किया। इस वक्त मदरसे में 175 हिंदू छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
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मदरसे के प्रिंसिपल मौलाना मोहम्मद उजैर आलम
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मदरसे के प्रिंसिपल मौलाना मोहम्मद उजैर आलम बताते हैं कि साढ़े तीन साल पहले मदरसे में कक्षा एक से पांचवीं तक के बच्चों को संस्कृत शिक्षा देने की शुरुआत की गई। इसके पीछे मकसद साफ है कि बच्चों को सभी भाषाओं की जानकारी होनी चाहिए। देव वाणी संस्कृत इससे अछूती कैसे रह सकती है।
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गीतामृतम की तालीम देते शिक्षक इफ्तिखार
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बताया कि मदरसे में अंग्रेजी के साथ ही कंप्यूटर शिक्षा भी दी जा रही है। मदरसे में काफी संख्या में हिंदू बच्चे उर्दू भी पढ़ते हैं। यहां संस्कृत पढ़ाने वाले एक और शिक्षक इफ्तिखार कहते हैं कि गीतामृतम पढ़ाना हो या फिर दीनी तालीम देनी हो, शिक्षक का काम केवल शिक्षा देना है।
मन: कामेश्वर मंदिर के महंत योगेश पुरी
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मदरसे के प्रिंसिपल मौलाना उजैर का कहना है कि मदरसे में संस्कृत पढ़ाने की प्रेरणा उन्हें मन: कामेश्वर मंदिर के महंत योगेश पुरी से मिली। वह अक्सर ही संस्कृत के श्लोकों का वाचन करके उनकी सुंदर व्याख्या करते हैं।