यमुना बचाने का संदेश लेकर बटेश्वर से वृंदावन के लिए निकले साधु संत और श्रद्धालु रविवार की शाम अपने दूसरे पड़ाव चौसिंगी पहुंचे। बटेश्वर के घाट पर यमुना पूजन, भोलेनाथ को नमन कर चले कारवां ने यमुना की दुर्दशा पर चिंता जताई। गाय और किसान की बदहाली का दर्द भी छलका। वहीं ग्रामीणों ने संतों का स्वागत किया। मुहिम से जुड़ने का संकल्प भी लिया।
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यमुना बचाओ की अलख जगाने को निकले साधु-संत
- फोटो : अमर उजाला
सुरभि सेवा सदन मथुरा के वंदन गिरि दास महाराज ने 36 दिवसीय पद यात्रा के दूसरे दिन यमुना की पवित्र धारा के लिए सरकार को चेताने और समाज को जगाने के लिए जन आंदोलन का ऐलान किया। उनके नेतृत्व में निकले साधु संत और श्रद्धालु रविवार को खॉद, बिजकौली, झाडे़ की गढ़ी, फरैरा , साहबराय का पुरा, तरासो, मुड़ियापुरा, आम का पुरा, चौसिंगी आदि गांवों में होते हुए चौसिंगी पहुंचे। रास्ते में पुष्प वर्षा कर गांव के लोग मुहिम से जुड़ते गए।
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भोलेनाथ पर जल चढ़ाते यमुना बचाने को निकले लोग
- फोटो : अमर उजाला
वंदन गिरि दास महाराज ने लोगों को बृज की धरोहर को सहेजने और यमुना को बचाने में सहयोग का आह्वान किया। दूसरे पड़ाव चौसिंगी पर पहुंची पदयात्रा में बिहार, बंगाल, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली, हरियाणा और यूपी के विभिन्न जिलों के साधु संत शामिल रहे। इस दौरान विदुषी कुसुम शर्मा, जगदीश बाबा, नारायन बाबा, शंकरदास बाबा, अनिलदास, जानकी घोष, ज्योत्सना दास, गीता दास, मुकुंद महाराज, कृष्णा भगत, सर्वानंद महाराज, सुमित्रा साहू, सुशीला साहू, खुशबू साहू, भारतीय किसान यूनियन के आगरा मंडल के अध्यक्ष गजेंद्र सिंह परिहार आदि मौजूद रहे।
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पदयात्रियों ने बटेश्वर के घाट पर यमुना नदी का पूजन किया
- फोटो : अमर उजाला
पदयात्रियों ने बटेश्वर के घाट पर यमुना नदी का पूजन किया। वंदन गिरि दास महाराज, सियाराम दास महाराज और विदुषी कुसुम शर्मा ने यमुना मैया को चादर चढ़ाई। उस समय यमुना का मैला आंचल देख साधु-संत भी दुखी हो उठे। विदुषी कुुसुम शर्मा ने कहा कि बटेश्वर यमुना की ससुराल है। ससुराल में नदी का पानी आचमन करने लायक तक नहीं रह गया है। सरकार को अब और अनदेखी नहीं करनी चाहिए। पूजन पुजारी जय प्रकाश गोस्वामी ने कराया। इसके बाद ब्रह्मलाल जी मन्दिर में अनुष्ठान के बाद आरती हुई।
चौसिंगी में दूसरे दिन की पद यात्रा का पड़ाव रहा। जहां सांझ ढलते ही भजन कीर्तन गूंजने लगा। ढोलक की थाप, मजीरों की झंकार के साथ साधु संतों ने जमकर नृत्य किया। इस दौरान विदुषी कुसुम शर्मा ने प्रवचन किए। लोगों को नदी में गंदगी न डालने का संकल्प दिलाया गया।