अब भूकंप के झटके भी ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर को हिला नहीं सकेंगे। आईआईटी दिल्ली और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की संयुक्त निगरानी में सिविल इंजीनियर वृंदावन के इस विश्व विख्यात मंदिर की नींव को तैयार करने में जुटे हुए हैं। अब यह कार्य तेजी के साथ आगे बढ़ रहा है, जिसके इस माह के अंत तक या फिर आगामी माह के प्रथम सप्ताह में पूरा होने की संभावना है।
विज्ञापन
2 of 5
बांकेबिहारी मंदिर में हो रहा मरम्मत कार्य
- फोटो : अमर उजाला
वृंदावन स्थित ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर के फर्श धंसने और मंदिर के गेट चार में एक तरफ झुकाव आने से हड़कंप मच गया था। मंदिर प्रबंधन करीब पांच माह से इस स्थित को सुधारने में जुटा हुआ है। दिल्ली की निर्माणदायी संस्था आईआईटी दिल्ली और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के विशेषज्ञों की मदद से मंदिर की नींव को मजबूत बना रही है।
विज्ञापन
3 of 5
बांकेबिहारी मंदिर के आंगन का धंसा फर्श (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
आईआईटी दिल्ली और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने सर्वे करते हुए प्राचीन श्रीबांकेबिहारी मंदिर में भूकंपरोधी उपाय न होने सहित जमीन में पानी के निरंतर रिसाव से भविष्य में बड़े खतरे के संकेत दिए थे। इन तकनीकी विशेषज्ञों की राय के बाद भविष्य में मंदिर की इमारत को भूकम्परोधी व मजबूत करने के उद्देश्य से निर्माण की रूपरेखा तैयार करते हुए निर्माण कार्य शुरू किया।
4 of 5
बांकेबिहारी मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
श्रीबांकेबिहारी मंदिर के प्रबंधक मुनीश शर्मा ने बताया कि मुख्य परिसर में करीब पांच फीट खुदाई करने के बाद अत्याधुनिक मशीनों की मदद से 15 मीटर गहराई तक कंक्रीट की 65 पाइलिंग की गई हैं। इसके बाद इंजेक्शन ग्राउटिंग की जा रही है।
बांकेबिहारी मंदिर में हो रहा मरम्मत कार्य
- फोटो : अमर उजाला
मंदिर में 25 फीट गहराई पर 40 पाइपों से सीमेंट की इंजेक्शन ग्राउटिंग हो रही है। इसके बाद कंक्रीट और लोहे की सरियों से फर्श तैयार कर उसके बाद कर्नाटक से लाये गये संगमरमर के पत्थरों की फिनिशिंग की जायेगी। इसमे लगभग एक महीने का समय लग सकता है।