बुलंद आगरा किले के पत्थर समय के साथ जर्जर होते जा रहे हैं। जगह-जगह से झड़ने लगे हैं। हाथी गेट भी इन्हीं में से एक है। इसके तमाम पत्थर निकल चुके हैं। बहुत से टूट भी गए हैं। रखरखाव के अभाव में बदहाल हो चुके स्मारक के इस हिस्से को उसका वैभव लौटाने के लिए संरक्षण कार्य शुरू कर दिया गया है। यह गेट कभी हाथी घाट की तरफ खुलता था।
Trending Videos
विज्ञापन
2 of 5
आगरा किले के हाथी गेट का संरक्षण कार्य शुरू
- फोटो : अमर उजाला
15 लाख रुपये से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण इस ऐतिहासिक गेट का संरक्षण कार्य करा रहा है। इसके लिए दीवार के सहारे पाड़ बांधी गई है। लाल पत्थरों को मौके पर ही तराशा जा रहा है। जिन जर्जर पत्थरों को बदला जाना है, नापजोख के बाद नये पत्थर तैयार किए जा रहे हैं। कुछ पत्थरों पर पच्चीकारी भी हो रही है। इसके लिए राजस्थान स्थित बंशी पहाड़पुर से लाल पत्थर मंगवाए गए हैं। दिसंबर आखिर तक इसका कार्य पूरा होना है।
विज्ञापन
3 of 5
आगरा किला में होता संरक्षण का कार्य
- फोटो : अमर उजाला
एएसआई के अधिकारी का कहना है कि इस गेट का अब तक संरक्षण कार्य नहीं हुआ था। इसके अभाव में आगरा किले के इस हिस्से के पत्थर काफी जर्जर हो चुके थे। स्थिति ये थी कि तमाम पत्थर अपनी जगह छोड़ चुके हैं।
4 of 5
आगरा किला
- फोटो : अमर उजाला
दिल्ली गेट, अमर सिंह गेट की तरह से आगरा किले में हाथी गेट है। यह हाथी घाट की तरफ खुलता था। कभी यमुना इस गेट के पास से होकर बहती थी। खाई के एक तरफ हाथी गेट और दूसरी तरफ यमुना थी। बताया जाता है कि मुगल काल में इस गेट से हाथी यमुना तक आया-जाया करते थे। इसलिए इस गेट का नाम हाथी गेट पड़ा। मगर, ब्रिटिश समय में इस गेट को बंद करवा दिया गया। पत्थरों से इसे चिनवा दिया गया। तभी से ये गेट बंद है। किले के भीतरी हिस्से में यह सेना के कब्जे वाले क्षेत्र में खुलता था।
दीवारों का नहीं हो पाया संरक्षण
- फोटो : अमर उजाला
हाथी गेट का संरक्षण कार्य शुरू कर दिया गया है। यह पहली बार हो रहा है। दिसंबर अंत तक कार्य पूरा कर लिया जाएगा। - एके गुप्ता, वरिष्ठ संरक्षण सहायक, एएसआई