आगरा में एक तरफ पुलिस का दावा है कि सटोरियों और जुआरियों को ढूंढ-ढूंढकर गिरफ्तार किया जा रहा है तो दूसरी ओर एत्माद्दौला स्मारक के ठीक पीछे यमुना किनारे दिनभर जुआ और सट्टा खेला जा रहा है। सटोरियों के नाम से गद्दी चल रही हैं, जुआरियों ने अड्डे (फड़) बना लिए हैं। अमर उजाला की टीम रविवार दोपहर यहां पहुंची तो लोगों ने बताया कि पुलिस इन अड्डों और गद्दियों पर छह महीने में एक बार भी नहीं आई है।
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जुआ-सट्टा से महिलाएं परेशान
- फोटो : अमर उजाला
सुबह छह बजे से आने लगते हैं जुआरी
जुए के अड्डे सुबह छह बजे से लग जाते हैं। जुआरी भी आने लगते हैं। रात में मजदूरी करने वाले लोग इन जुआरियों के जाल में फंसे हुए हैं। गांधी स्मारक के पास महिलाओं ने बताया कि मजदूरों को दिहाड़ी 300 से 400 रुपये मिलती ही। इनमें से 100 रुपये जुए में और 50 टिंचर में गंवा देते हैं। पत्नी के हाथ में 150-200 रुपये थमाते हैं। वो घर चलाने के लिए और पैसे मांगती है, तो उसे पीटते हैं। एत्माद्दौला थाने में अक्तूबर माह में ऐसी 34 शिकायतें हैं जिनमें पत्नी ने शराब पीकर पत्नी को पीटा।
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कैमरा देखते ही भागे जुआ खेलने वाले लोग
- फोटो : अमर उजाला
फोटो खिंचते ही भाग गए जुआरी
अमर उजाला टीम दोपहर तीन बजे श्रीमद् दयानंद अनाथालय के ठीक पीछे यमुना किनारे पहुंची। यहां जुए की दो फड़ लगी थीं। फोटो खिंचते ही जुआरी भाग गए। इस अड्डे के बराबर में खंडहर के भीतर टिंचर पी रहे दो युवक भी टिंचर की शीशी को छोड़कर भाग गए। एत्माद्दौला, गांधी स्मारक, आंबेडकर पुल के नीचे भी जुए के फड़ लगे हुए थे।
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एत्माद्दौला क्षेत्र में जुआ खेलते युवक
- फोटो : अमर उजाला
सट्टे से बर्बाद लोग फंसे सूदखोरों के जाल में
आंबेडकर पुल के पास बस्ती में अमर उजाला टीम ने महिलाओं से पूछा कि यहां जुआ, सट्टा तो नहीं होता है? जवाब मिला- यहां और होता ही क्या है? मजदूर, कारीगर, ठेकेदार सब सट्टे में फंसकर बर्बाद हो रहे हैं। ये लोग एक के सौ करने के लालच में पूरी कमाई गंवा रहे हैं। परिवार में कोई बीमार हो, शादी हो, बच्चे का जन्म हो तो सूदखोरों से पैसा लेते हैं। इसके बाद सूदखोर इन्हें निचोड़ देते हैं।
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एत्माद्दौला क्षेत्र स्थित चौबुर्जी स्मारक
- फोटो : अमर उजाला
चौबुर्जी को बना लिया जुआरियों ने अड्डा
यमुना पार में प्राचीन स्मारक है चौबुर्जी। मुगल सम्राज्य के संस्थापक बादशाह बाबर की मृत्यु हो जाने पर पहले यहीं चौबुर्जी में कुछ समय के लिए दफनाया गया था। बाद में शव को काबुल ले जाकर स्मारक बनाया गया। स्मारक के दरवाजे पर ताला लगा है। अंदर ताश के पत्ते पड़े हैं। ठीक पीछे लोग जुआ खेल रहे हैं। पास के लोगों ने बताया कि स्मारक में अब जुआरी, नशेड़ी ही आते हैं।
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चौबुर्जी स्मारक में पड़ा शराब का पाउच और ताश के पत्ते
- फोटो : अमर उजाला
एत्माद्दौला पुलिस की कार्रवाई अब तक शून्य
आईजी रेंज की सख्ती पर एसएसपी बबलू कुमार ने शहर में सटोरियों और जुआरियों की गिरफ्तारी का जो अभियान चलाया है, उसमें अब तक एत्माद्दौला थाना पुलिस का खाता नहीं खुला है। इतने बड़े पैमाने पर जुआ और सट्टा होने के बावजूद कोई गिरफ्तारी न होना सवाल खड़ा कर रहा है। आईजी रेंज ने एसएसपी को 70 सटोरियों की जो सूची सौंपी थी, उसमें एत्माद्दौला क्षेत्र के सटोरियों के नाम भी हैं।
एत्माद्दौला क्षेत्र में जुआ खेलते युवक
- फोटो : अमर उजाला
100 से 1000 तक गंवा रहे सट्टे में
लोगों ने बताया कि यमुना पार में दो तरह का सट्टा होता है। एक तो मटके का और दूसरा खाईबाड़ी का है, यह नंबर वाली पर्ची से चलता है। इसमें खेलने वाले से 100 रुपये लिए जाते हैं। 200-250 लोगों की रकम जमा हो जाने पर एक नंबर निकाला जाता है। इस नंबर की पर्ची जिसके पास होती है, उसे 100 गुना यानी 10 हजार रुपये दिए जाते है। दूसरा सट्टा ऑनलाइन चल रहा है। इसमें नंबर कंप्यूटर से निकलता है। इसकी गद्दी घरों के अंदर है। इसमें खेलने वाले से 1000 रुपये लिए जाते हैं।