हरियाणा के झज्जर निवासी बेरीवाला परिवार में जन्मे राधेश्याम और उनकी पत्नी गायत्री देवी सौभाग्यशाली हैं, जो पिछले 50 वर्षों से ठाकुर बांकेबिहारी जी के गालों के लिए केसर कीच, चौबा व अग्रजा (पाउडर) तैयार कर रहे हैं। कीच को कपूर, छोटी इलायची, चंदन, केसर, गुलाब जल, कस्तूरी से तैयार किया जाएगा। चौबा को काजल, इत्र व चमेली के तेल से तैयार किया जाता है।
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बरसाना के श्रीजी मंदिर में उड़ता रंग गुलाल
- फोटो : अमर उजाला
लठमार होली के बाद 17 मार्च को रंगभरनी एकादशी पर वृंदावन के ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में होली खेली जाएगी। श्रृंगार आरती के बाद जैसे ही केसर कीच सेवायतों द्वारा आराध्य के गालों पर लगाई जाएगी, तभी से मंदिर में होली की विधिवत शुरुआत होगी। राधेश्याम बेरीवाला ने बताया कि उनके चाचा हरगुलाल बेरीवाला ने 100 वर्ष पूर्व बांके बिहारी की सेवा शुरू की थी।
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बांकेबिहारी मंदिर में भक्तों पर बरसा 'प्रेमरंग' (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
16 मार्च की रात से ही मंदिर में हटरी का सिंहासन सज जाएगा। इसे सन 2004 में बनवाया गया था, जिसके निर्माण में करीब 38 किलो चांदी व एक क्विंटल शीशम की लकड़ी का प्रयोग किया गया है। प्रतिदिन सुबह के लिए गायत्री देवी जबकि शाम के लिए वे स्वयं केसर कीच तैयार करेंगे। होली उत्सव के दौरान एक विशेष दिन जलेबी के साथ ठाकुर जी को चाट-पकौड़ी का भोग भी लगाया जाएगा।
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बांकेबिहारी मंदिर (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
बांकेबिहारी मंदिर में होने वाले होली उत्सव में प्रतिदिन सुबह-शाम ठाकुर जी नित नई पोशाक धारण करेंगे। यह सभी पोशाकें सफेद रंग की होंगी। इसी के साथ ठाकुर जी एकादशी को कमर में लाल गुलाल की पोटली का फेंटा बांधे नजर आएंगे। डोल की पोशाक अलग से बनवाई गई है।
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बांकेबिहारी मंदिर में श्रद्धालु (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला
बांकेबिहारी मंदिर में एकादशी की शाम चार बजे से 500 किलो फूलों की होली के अलावा करीब एक क्विंटल के हरा, लाल, पीला, गुलाबी गुलाल व भुड़भुड़ के थाल भक्तों पर उड़ाए जाएंगे।
वृंदावन में ऐसा पहली बार होगा जब रंगभरनी एकादशी पर सुबह से ही ठाकुर श्री बांके बिहारी भक्तों पर रंग बरसाएंगे। हर बार इस एकादशी पर शाम को ही मंदिर में होली की शुरुआत होती रही है लेकिन इस बार 17 मार्च को रंगभरनी एकादशी पर सुबह श्रृंगार आरती के साथ ही मंदिर में रंग-गुलाल की बरसा होगी।