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...तो इसलिए इस्लाम में सबसे पाक महीना है रमजान

Fri, 02 Jun 2017 10:20 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला आगरा
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रमजान मुबारक - फोटो : अमर उजाला
इस्लाम की बुनियाद पांच अरकानों पर टिकी है। तौहीद (कलमा पढ़ना), नमाज अदा करना, रोजा रखना, जकात अदा करना और हज करना। पांच बुनियादों को मानना फर्ज है। इसमें एक को भी नहीं मानने वाला इस्लाम से खारिज माना जाएगा। इन पांचों को मानते हुए जो इंसान इस्लाम में दाखिल होता है। उसकी जिंदगी आसान और खुशगवार गुजरती है। 
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रमजान मुबारक - फोटो : अमर उजाला
इस्लाम की तालीम पर अमल करने वाला इंसान हमेशा ही कामयाब होता है। इनमें हर अरकान की अपनी फजीलत है। पांचों को करना हर मुसलमान के लिए फर्ज भी। इस बारे में मौलाना इकरार हुसैन और हाजी मोहम्मद इकबाल ने बताया कि पांच अरकान का मानने वाला ही इस्लाम में दाखिल हो सकता है। ये पांच अरकान हैं...
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रमजान मुबारक - फोटो : अमर उजाला
तौहीद (कलमा पढ़ना): अल्लाह को एक मानना। उसकी जात में किसी दूसरे को शरीक न करना। साथ ही अल्लाह के नबी को आखिरी पैगंबर मानना। आखिरी किताब कुरान-ए-पाक है। इसमें पूरा दीन मुकम्मल कर दिया है। तौहीद कुबूल करने के बाद ही इंसान इस्लाम में दाखिल होता है।

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रमजान मुबारक - फोटो : अमर उजाला
नमाज: हर मुसलमान मर्द और औरत पर पांच वक्त की नमाज फर्ज है। नमाज की छूट किसी भी हालत में नहीं है। जब तक आदमी होश में है, तब उस पर नमाज माफ नहीं है। अगर आदमी सफर में है, तो भी उस पर नमाज की छूट नहीं है। हां आधी नमाज पढ़ सकता है। औरतों के लिए कुछ दिनों के लिए नमाज की छूट है।
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ramzan
रोजा: रमजान माह में एक माह के रोजे फर्ज हैं। अल्लाह ताला हमें आजमाता है कि कौन कितना परहेजगार है। रोजे के बारे में अल्लाह ने फरमाया है कि इसका अजर मैं खुद ही दूंगा।
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- फोटो : amar ujala
जकात: जकात हर उस मुसलिम पर फर्ज है जिसके पास साढ़े सात तोला सोना या साढ़े बावन तोले चांदी या फिर इनके बराबर रकम हो उसे भी पूरा एक साल हो चुका हो, तो हर आदमी पर जकात फर्ज हो जाती है।
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रमजान (फाइल फोटो)
हज: मुसलमान पर जिंदगी में सिर्फ एक बार हज करना फर्ज है। हज भी उसी शक्ल में फर्ज है, जब हज जाने वाले के पास इतना पैसा हो कि वह हज के दौरान रहन-सहन, आने-जाने का खर्च उठा सके। इसके अलावा जितने दिन के लिए हज की जियारत पर है, उतने दिन उसके परिवार को खाने-पीने आदि की दिक्कत न हो। परिवार के पास इतना पैसा हो कि वह अपने घर का खर्चा आसानी से चला सके।
 
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रमजान - फोटो : अमर उजाला
कुल मिलाकर कहा जाए तो इस्लाम के इन पांच अरकान फर्ज हैं। अगर कोई भी इन अरकान को मानने से इनकार करता है, तो वह इस्लाम से खारिज माना जाता है। हर मुसलिम को रमजान मुबारक का अहतराम और इबादत करनी चाहिए। इस माह में इस्लाम के पांच रुकुनों में से चार पूरे होते हैं। 
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