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Agra: रामबरात में 82 साल पहले अंग्रेज कलेक्टर हार्डी पर फेंका गया था बम, हिल गई थी ब्रिटिश हुकूमत

Thu, 22 Sep 2022 07:11 AM IST
धीरेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, आगरा
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हार्डी बम कांड - फोटो : अमर उजाला
उत्तर भारत की प्रसिद्ध रामबरात तब पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई थी, जब 82 साल पहले 27 सितंबर 1940 को तत्कालीन अंग्रेज कलेक्टर हार्डी पर आगरा के तीन क्रांतिकारियों ने बम फेंका था। वह रामबरात देखने बेलनगंज चौराहा स्थित बरौलिया बिल्डिंग पर आया था। क्रांतिकारी रोशन लाल गुप्त करुणेश, वासुदेव गुप्त और रामप्रसाद भारतीय ने इसे अंजाम दिया। इसमें कलेक्टर हार्डी समेत 32 अन्य लोग घायल हुए थे। रामबरात में हुई इस घटना ने आगरा को पूरे देश में चर्चित कर दिया था और ब्रिटिश हुकूमत तक हिल गई थी। 

हार्डी बमकांड में शामिल रहे क्रांतिकारी रोशनलाल गुप्त करुणेश के बेटे और वरिष्ठ पत्रकार आदर्श नंदन गुप्त ने बताया कि रामबरात देखने के लिए अंग्रेज कलेक्टर हार्डी को बेलनगंज चौराहा स्थित बरौलिया बिल्डिंग पर बुलाया गया था। जैसे ही भगवान राम का हाथी बेलनगंज चौराहा पर रेलवे पुल पार करके निकला, बमों के धमाके गूंज उठे। भगदड़ मच गई। कलेक्टर हार्डी कुर्सी से गिर पड़ा। उसको चोटें भी आईं। 32 अन्य लोग भी घायल हुए। सभी को अस्पताल में भर्ती कराया गया। उनके पिता ने ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ वर्ष 1938 में साप्ताहिक अखबार आशा निकालना शुरू किया था। 
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इसी इमारत से फेंका गया था बम - फोटो : अमर उजाला
हार्डी बमकांड को अंजाम देने के बाद तीनों क्रांतिकारी इंकलाब जिंदाबाद के नारे लगाते हुए भाग निकले। बाद में अंग्रेजों ने शक के आधार पर लोगों को गिरफ्तार करना शुरू किया। इस कांड में शामिल वासुदेव गुप्त ही अंग्रेजों की पकड़ में आए थे। उन्हें कठोर यातनाएं दी गईं, लेकिन उन्होंने अपने दोनों साथियों के नाम नहीं बताए।
 
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क्रांतिकारी स्व रोशन लाल गुप्त - फोटो : अमर उजाला
 इसके बाद रोशनलाल और रामप्रसाद अंडरग्राउंड हो गए थे। हालांकि एक साल बाद उनकी गिरफ्तारी हो गई थी। इस बमकांड को बर्लिन रेडियो ने प्रसारित किया था। इससे पूरी दुनिया में बमकांड के खबर की गूंज रही।

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स्वतंंत्रता सेनानी वासुदेव गुप्त - फोटो : अमर उजाला
आदर्श नंदन गुप्त ने बताया कि उनके पिता ने क्रांतिकारियों से बम बनाना सीखा था। इस कांड के बाद वो अधिक तीव्रता का बम बना रहे थे। बम के परीक्षण के दौरान उनकी आंखों पर असर हुआ। मगर, भूमिगत होने के कारण वो इलाज नहीं करा सके। ऐसे में उनके आंखों की रोशनी चली गई थी। 
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क्रांतिकारी स्व. राम प्रसाद भारतीय - फोटो : अमर उजाला
इसके बाद भी वो अंग्रेजों के खिलाफ अपनी कलम से आवाज बुलंद करते रहे थे। इस कांड के बाद से ही रामबरात में पुलिस व्यवस्था और कड़ी कर दी गई थी।
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