पुलवामा में शहीद हुए मैनपुरी के थाना बरनाहल क्षेत्र के गांव विनायकपुर निवासी शहीद रामवकील के दिल के दो महत्वपूर्ण ख्वाब उनके दिल में ही दफन हो गए। शहीद रामवकील अपने बेटे को इंटरनेशनल फुटबालर और भतीजे को आईएएस बनाना चाहते थे। इसके लिए वे हर संभव प्रयास कर रहे थे। शहीद रामवकील के गांव विनायकपुर में चौथे दिन भी सन्नाटा पसरा हुआ था। शहीद की पत्नी गीता देवी का कहना था कि उनके पति का सपना था कि उनका बड़ा बेटा इंटरनेशनल फुटबालर बने।
विज्ञापन
2 of 5
शहीद राम वकील का अंतिम संस्कार
- फोटो : अमर उजाला
इसी ख्वाब को पूरा करने के लिए उसका एडमिशन केंद्रीय विद्यालय इटावा में कराया गया था। वह अच्छा खेल भी रहा था। हाल ही में मंडलीय टीम में उसका चयन हुआ था। प्रदेशीय ट्रायल के लिए उसने आवेदन किया है जो मार्च में होना है। शहीद की पत्नी यह बताते हुए भावुक हो गई। शहीद की पत्नी ने बताया कि जाते समय वह कहकर गए थे कि मार्च में निश्चित ही उनके बेटे का प्रदेशीय टीम के लिए चयन कर लिया जाएगा। इसके लिए बेटे को अलग से प्रशिक्षण दिलाने के लिए उन्होंने विद्यालय के कोच से भी मुलाकात की थी। बेटा अंकित सिंह केंद्रीय विद्यालय इटावा में कक्षा छह का छात्र है।
विज्ञापन
3 of 5
शहीद राम वकील
शहीद रामवकील दो भाई थे। भाई रामनरेश की पत्नी अपने डेढ़ साल के बेटे शिव कुमार को छोड़कर 20 साल पहले मौत हो गई थी। वर्ष 2000 में रामवकील ने सीआरपीएफ में ज्वाइन किया तो भतीजे को बेहतर शिक्षा दिलाकर आईएएस बनाने का सपना देखा। भतीजे शिव कुमार को वह दिल्ली में आईएएस की कोचिंग भी दिला रहे थे। अंतिम बार 10 फरवरी को घर से जाने के बाद दिल्ली में शिवकुमार से मुलाकात भी की।
4 of 5
शहीद राम वकील
शिव कुमार ने बताया कि चाचा ने उसके साथ दिल्ली में खाना खाया और उसे 500 रुपये दिए। घर से वह कुछ मिठाइयां भी लाए थे जो उसे दे गए और कहा कि बाकी कोई जरूरत हो तो घर से मंगा लेना। यह बताते बताते शिव कुमार का गला भर आया। शिव कुमार ने बताया कि चाचा का सपना था कि मैं आईएएस बनूं। शिव कुमार ने यह भी बताया कि पढ़ाई में किसी प्रकार की बाधा न हो इसलिए चाचा के एक खाते का एटीएम भी उसके पास ही रहता था। शिव कुमार अंतिम बार चाचा के साथ खाए हुए खाना तथा बातचीत को भुला नहीं पा रहा है।
छत्तीसगढ़ में साथी की लूटी हुई रायफल कराई थी बरामद
5 of 5
शहीद को गार्ड ऑफ ऑनर देते जवान
- फोटो : अमर उजाला
शहीद रामवकील के एक मात्र भाई रामनरेश ने बताया कि छत्तीसगढ़ में ड्यूटी के दौरान रामवकील और उनके साथियों की नक्सलियों से मुठभेड़ हो गई थी। इस दौरान तीन दिन तक मुठभेड़ हुई। नक्सली उनके एक साथी की राइफल छीन ले गए। बाद में तीसरे दिन रामवकील ने तीन नक्सली हिरासत में लिए और साथी की राइफल बरामद कराई। रामवकील की बहादुरी के चर्चें उनकी चौपाल और क्षेत्र में चल रहे हैं।