नवोदय विद्यालय में छात्रा की कथित हत्या के मामले में पुलिस ने जांच पर कम, पर्चे काटने पर ज्यादा ध्यान दिया। अगर जांच गंभीरता से की गई होती तो ढाई महीने में पुलिस मामले का खुलासा कर आरोपी को सलाखों के पीछे पहुंचा सकती थी।
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जिला अस्पताल स्थित ब्लड बैंक के बाहर खड़ी पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
नवोदय विद्यालय में कक्षा 11 की छात्रा की मौत के बाद परिजन हत्या करने का आरोप लगाते हुए पिता ने रिपोर्ट भी हत्या की धाराओं में दर्ज कराई। बेटी के साथ दुष्कर्म की भी संभावना जताई। वहीं दूसरी ओर पुलिस के आला अफसर मामला आत्महत्या का ही बताते रहे। विवेचना में जुटी भोगांव पुलिस की भी रफ्तार शुरू से ही सुस्त रही। यही वजह है कि पुलिस 16 सितंबर की सुबह हुई घटना का अब तक खुलासा नहीं कर सकी है।
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जवाहर नवोदय विद्यालय भोगांव में जांच करते आईजी कानपुर मोहित अग्रवाल व सीओ एसटीएफ श्यामकांत
- फोटो : अमर उजाला
वहीं पुलिस सूत्रों के अनुसार की मानें तो विवेचना के नाम पर विवेचक की ओर से कागजी कार्रवाई बढ़ चढ़कर की गई है। जांच के नाम पर अब तक 35 पर्चे काटे जा चुके हैं। फिर भी यह तय नहीं हुआ कि छात्रा की हत्या हुई या फिर उसने आत्महत्या की। दुष्कर्म की पुष्टि भी स्लाइड जांच में हुई है।
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एसपी अजय शंकर राय
- फोटो : अमर उजाला
पर्चा पुलिस की भाषा का शब्द है। किसी भी वारदात की विवेचना में जुटे विवेचक को जांच का दैनिक ब्यौरा देना पड़ता है। उसे लिखना पड़ता है कि वह जांच के लिए कहां-कहां गया, किससे बात की, किसके बयान दर्ज किया और उस दिन की जांच में क्या प्रगति रही।
नवोदय विद्यालय में छात्रा की कथित हत्या के मामले में शुरुआत में ही जांच का दायरा बढ़ गया था। परिजनों के विरोध प्रदर्शन के चलते मुख्यमंत्री की ओर से एसटीएफ को जांच सौंपी गई थी। साथ ही सीबीआई जांच की सिफारिश भी हो गई थी। सूत्र बताते हैं कि यह वजह भी रही कि थाना पुलिस की विवेचना की रफ्तार सुस्त हो गई। पुलिस की निगाहे एसटीएफ की जांच पर टिकी हुई थीं।