यमुनापार में अवैध रूप से संचालित अनाथालय में अनियमितताएं मिलने के बाद प्रशासन की आंख खुली है। जिलाधिकारी एनजी रवि कुमार ने दस दिन में सभी अनाथ आश्रम को जेजे एक्ट के तहत पंजीकृत कराने का आदेश दिया है। इसके लिए जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय के माध्यम से नोटिस जारी होंगे। इसके साथ ही डीपीओ लवकुश भार्गव से भी जवाब तलब किया है।
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अनाथालय को सील करने के दौरान अधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
शहर में बिना पंजीकरण के कई अनाथ आश्रम संचालित हो रहे हैं। इन आश्रमों के प्रबंधक पिछले दो साल में पंजीकरण की प्रक्रिया चलने का हवाला दे रहे हैं। लेकिन अभी तक अधिकांश अनाथ आश्रम ने अपना पंजीकरण नहीं कराया है। जिला प्रोबेशन अधिकारी के स्तर से भी लगातार लापरवाही बरती गई। पंजीकरण प्रक्रिया पूरी होने से पहले इन्हें संचालित होने दिया। नियमित इन पर नजर भी नहीं रखी। इन्हीं लापरवाहियों पर डीएम ने डीपीओ से जवाब तलब किया है। उन्हें चार दिन में अपना स्पष्टीकरण देना है। स्पष्टीकरण न मिलने या स्पष्टीकरण संतोषजनक न होने पर उनके खिलाफ शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
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बच्चे व महिलाओं को बस में ले जाते हुए
- फोटो : अमर उजाला
यमुना पार के अनाथालय के प्रबंधक का कार्यभार देख रहे संजय शर्मा का कहना है कि यहां 18 से 26 साल तक के युवक और विवाहित महिलाओं के रहने की जानकारी डीपीओ को पत्र भेजकर दी थी। उनसे कहा गया था कि इन्हें अनाथालय से बाहर निकलवाएं। उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की। पत्रों के बारे में संजय शर्मा का कहना है कि यह रिकार्ड में है, इसे सील कर दिया गया है। हालांकि सीडीओ जे रीभा का कहना है कि इस तरह का कोई पत्र मिलने की डीपीओ ने जानकारी नहीं दी है।
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इसी अनाथालय में हुई थी घटना
- फोटो : अमर उजाला
यमुना पार के अनाथालय में अनियमितताएं मिलने पर हड़कंप मच गया है। डीएम के निर्देश पर डीपीओ लवकुश भार्गव ने सोमवार से अनाथ आश्रमों की जांच शुरू की गई। पहले दिन प्रतापपुरा स्थित मिशनरी आफ चैरिटी के आश्रम पहुंचे। यहां आश्रम से संबंधित सभी दस्तावेज खंगाले।
निर्भय नगर निरीक्षण करने पहुंचे डीएम एनजी रवि कुमार, एसएसपी बबलू कुमार व अन्य
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सवाल: बिना पंजीकरण के अनाथ आश्रम संचालित हो रहे हैं, कौन जिम्मेदार है?
जवाब: जिला प्रोबेशन अधिकारी के विभाग पर इनकी निगरानी का दायित्व है। पंजीकरण न होने की स्थिति में कदम उठाने चाहिए थे। डीपीओ से जवाब तलब किया है। लापरवाही साबित होने पर उनके खिलाफ शासन को रिपोर्ट भेजी जाएगी।
सवाल: शासन में अन्य रिपोर्ट भी गई हैं। क्या इस बार कोई परिणाम निकलेगा?
जवाब: रिपोर्ट भेजने के बाद शासन में संबंधित अधिकारी के कार्यालय को हमारी ओर से रिमांडर भेजा जाता है। शेष निर्णय शासन स्तर से होता है। पूर्व में हुए स्टांप घोटाले, संजय प्लेस में गलत छापामारी की शिकायत पर शासन को भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन आरोपी अधिकारियों की जांच चल रही है। इस मामले में भी दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई होगी। -एनजी रवि कुमार, डीएम