पचगांई, ठाकुरदास की गढ़ी, देवरी, हरकन्ना की गढ़ी, गंगरुआ, भैंटा आदि गांवों में अमर उजाला दफ्तर में 25 से अधिक फोन आए। सबका सवाल एक ही था, रोहता-दिगनेर रोड कब बनेगी? हम कलक्ट्रेट, कमिश्नरी में शिकायत कर कर थक चुके हैं, सुनवाई नहीं हो रही। इस पर अमर उजाला टीम इस मार्ग का जायजा लेने पहुंची तो पता चला कि सड़क उखड़ चुकी है, सिर्फ गड्ढे बचे हैं। एक हजार से ज्यादा बड़े गड्ढे हैं, छोटों की गिनती ही नहीं...
विज्ञापन
2 of 5
रोहता-दिगनेर रोड
- फोटो : अमर उजाला
इस सड़क किनारे नौ गांव हैं। डेढ़ लाख से अधिक की आबादी पिछले दो साल से परेशानी झेल रही है। दिन-रात गुजरने वाले अनगिनत वाहन चालक तो परेशान हैं ही। यह सड़क लोक निर्माण विभाग के अधीन है। मगर, विभाग को इसकी मरम्मत का ध्यान ही नहीं है। विभाग की लापरवाही के चलते हजारों लोग मुसीबत झेलने को मजबूर हैं। क्षेत्रीय लोग कई बार शिकायत कर चुके हैं लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। हादसों की संभावना बनी रहती है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि दो साल पहले यह सड़क बनाई गई थी लेकिन इसकी गुणवत्ता खराब थी इसलिए कुछ ही महीने में ये टूट गई।
विज्ञापन
3 of 5
सड़क की उखड़ी गिट्टियां
- फोटो : अमर उजाला
इस सड़क के पिछले साल गड्ढे भरवाए गए थे। मगर, इस कार्य की गुणवत्ता इतनी खराब थी कि चंद दिनों में ही ये सड़क फिर से उखड़ गई। बारिश के दिनों में तो इसकी गिट्टियां उखड़कर किनारे चली गईं। पूरी सड़क धंस चुकी हैं।
4 of 5
स्थानीय नागरिक
- फोटो : अमर उजाला
पिछले दो साल से क्षेत्रीय लोग परेशानी उठा रहे हैं। ये इतनी खराब हो गई है कि इस पर दो कदम भी वाहन चलाना आसान नहीं है। - विक्रम सिंह यादव
गड्ढों की वजह से इस रोड पर आए दिन हादसे होते रहते हैं। पीडब्ल्यूडी विभाग इसकी सुध ही नहीं ले रहा। - कृष्ण गोपाल रावत
बारिश के दिनों में यहां हाल बेहाल हो जाता है। पूरा रोड ताल-तलैया बन जाता है। पता ही नहीं चलता सड़क कहां है। - अमरेश
चार पहिया तो दूर दोपहिया वाहनों का गुजरना भी मुश्किल हो जाता है। कई बार शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। - करन कुशवाह