हाईस्पीड ट्रेन के दौरे में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के पैतृक गांव बटेश्वर में रेल की रफ्तार बहुत सुस्त है। आगरा-इटावा वाया बटेश्वर रेल लाइन का उद्घाटन 24 दिसंबर 2015 में हुआ था। तब से चार साल बीत गए। बटेश्वर हाल्ट को रेलवे स्टेशन का दर्जा नहीं मिला सका है। पीने का पानी, प्रकाश तक मयस्सर नहीं है। डेमू पैसेंजर के साथ रेल परियोजना शुरू हुई थी। बटेश्वर के लोग चाहते हैं कि सरकार डेमू के अलावा यहां दूसरी ट्रेनों के संचालन पर भी ध्यान दें, ताकि पिछड़े इलाके में विकास को रफ्तार मिल सके।
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बटेश्वर हाल्ट
- फोटो : अमर उजाला
वर्ष 2015 में रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के ड्रीम प्रोजेक्ट आगरा-इटावा वाया बटेश्वर रेल लाइन का उद्घाटन किया था। इससे पूर्व रेल लाइन का शिलान्यास अटल जी ने 6 अप्रैल 1999 में किया था। उद्घाटन के वक्त इलाके के लोगों ने बटेश्वर को रेलवे स्टेशन का दर्जा देने के साथ ही ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की मांग की थी।
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बटेश्वर हाल्ट पर न पानी की व्यवस्था है और न उजाला
- फोटो : अमर उजाला
राज्य मंत्री ने भरोसा भी दिलाया था। चार साल बीतने के बाद भी बटेश्वर हाल्ट पर प्रकाश और पीने के पानी तक का इंतजाम नहीं है। आज भी यहां के लोग डेमू पैसेंजर के भरोसे हैं। हालांकि गाजीपुर बांद्रा एक्सप्रेस ट्रेन रूट से गुजरती है। लेकिन अटलजी के गांव में स्टापेज नहीं है। बटेश्वर बिजकौली के अनिल यादव, राजू यादव, प्रधान लक्ष्मी नारायन यादव ने हाल्ट पर सबमर्सिवल पंप लगाए जाने, प्रकाश का इंतजाम करने और स्टेशन का दर्जा दिए जाने की मांग की है।
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बटेश्वर हाल्ट
- फोटो : अमर उजाला
आगरा-इटावा वाया बटेश्वर रेल लाइन के सफर को 4 साल पूरे हो गए। पर, बीहड़ के रास्ते पर डर और दहशत अभी भी कायम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान से भी अटल जी के गांव की रेल दूर है। चार साल पूरे होने पर इस रेल लाइन पर चलने वाली एक मात्र पैसेंजर ट्रेन डेमू की पड़ताल की गई। सुविधाओं के नाम पर डेमू में सुरक्षा दूर दूर तक नहीं थी।
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बटेश्वर
- फोटो : अमर उजाला
ट्रेन में यात्रा कर रहे पंकज मिश्रा, अतुल चौधरी, सतीश, रतनदीप कौशल, सीमा, रीता, कमलेश, सावित्री ने बताया कि बीहड़ से गुजरते समय डर लगता है। सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है। रास्ते में डेमू खराब हो जाए तो कोई विकल्प भी नहीं है। डेमू में गंदगी से भी यात्रियों को दिक्कत होती है। कूडे़ के ढेर साफ करने का इंतजाम नहीं है। कभी कभी बदबू से लोग बेहाल हो जाते हैं।
बटेश्वर हाल्ट के लिए कच्चा रास्ता
- फोटो : अमर उजाला
बटेश्वर के लोगों ने मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक कई पत्र लिखे गए। लेकिन बाह के रेलवे स्टेशन से मुख्य मार्ग तक पक्की सड़क नहीं बन सकी है। उबड़ खाबड़ रेतीले रास्ते से आते जाते यात्री हादसे का शिकार होते रहते हैं। महज एक किमी के कच्चे रास्ते को पक्का कराये जाने में केंद्र और प्रदेश सरकार विफल रही है।