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श्री पारस अस्पताल: छह महीने से मरीजों पर मंडरा रहा था 'खतरा', आग बुझाने के नहीं थे इंतजाम

Tue, 22 Jun 2021 09:36 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

श्री पारस अस्पताल को क्लीन चिट देने के मामले में प्रशासन कटघरे में हैं, लेकिन अस्पताल को प्रशासन का सहयोग बीते साल से ही लगातार मिल रहा था। 
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श्री पारस अस्पताल आगरा - फोटो : अमर उजाला
आगरा के बाईपास स्थित श्री पारस अस्पताल को छह महीने से अग्नि सुरक्षा के इंतजाम के बिना ही संचालित किया जा रहा था। 27 जनवरी को अग्निशमन विभाग ने श्री पारस अस्पताल की जांच के बाद प्रशासन को रिपोर्ट सौंप दी थी कि अग्नि सुरक्षा के इंतजाम पूरे नहीं हैं। इन्हें पूरा करने के लिए अस्पताल संचालक को भी समय दिया गया था। 22 अप्रैल को अग्निशमन विभाग के निरीक्षण में फिर खामियां पाई गईं। इसकी रिपोर्ट प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को भी भेजी गई, लेकिन फिर भी अस्पताल को कोविड अस्पताल बना दिया गया, जबकि उसी दौर में देश के कई कोविड अस्पतालों में आग लगने से मरीजों की मौत होने की घटनाएं हुई थीं। श्री पारस अस्पताल को क्लीन चिट देने के मामले में प्रशासन कटघरे में हैं, लेकिन अस्पताल को प्रशासन का सहयोग बीते साल से ही लगातार मिल रहा था। न केवल आक्सीजन मामले में, बल्कि संक्रमण और अग्निशमन खामियों के बाद भी प्रशासन ने अस्पताल पर कोई कार्रवाई नहीं की।
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श्री पारस अस्पताल: मुख्य दरवाजे पर तैनात पुलिसकर्मी - फोटो : अमर उजाला
जनवरी में अग्निशमन विभाग ने शहर में संचालित कोविड मेडिकल कॉलेज और अस्पताल का निरीक्षण किया गया था। इसमें एत्माद्दौला, हरीपर्वत, न्यू आगरा क्षेत्र के छह अस्पताल भी शामिल थे। श्री पारस अस्पताल का 27 जनवरी को निरीक्षण किया गया था। इन कमियों के बाद 22 अप्रैल को फिर निरीक्षण हुआ तो फिर खामियां मिलीं। अस्पताल प्रबंधन ने अग्निशमन मानकों का पालन नहीं किया। अधूरे इंतजामों पर भी श्री पारस अस्पताल को कोविड अस्पताल बनाया गया। 

 
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श्री पारस अस्पताल में जांच के लिए आए अधिकारी - फोटो : अमर उजाला
मुख्य अग्निशमन अधिकारी अक्षय रंजन शर्मा ने बताया कि श्री पारस अस्पताल के निरीक्षण में आग से सुरक्षा के मानक पूरे नहीं थे। जनवरी और अप्रैल में निरीक्षण किया गया। दोनों बार कमियां मिली थीं। इस पर अस्पताल के प्रबंधक को पत्र लिखा था। इसकी रिपोर्ट जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को भी दी गई थी।

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श्री पारस अस्पताल: सीलिंग की कार्रवाई करने पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम - फोटो : अमर उजाला
ये थी व्यवस्था
1. केवल 10 हजार लीटर का टैरेस टैंक, 450 एलपीएम क्षमता की पंप।
2. होजरील कार्यशील।
3. छह फायर एक्सटिंग्यूशर।
4. बंद मिला ऑटोमेटिक फायर इन्फोर्मेशन सिस्टम
5. डाउनकमर सिस्टम।
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पारस अस्पताल - फोटो : अमर उजाला
यह की थी संस्तुति
1. 50 हजार लीटर का भूमिगत टैंक।
2. 1620 एलपीएम क्षमता का विद्युत चालित पंप, 180 एलपीएम क्षमता का जौकी पंप।
3. बेसमेंट में ऑटोमेटिक स्प्रिंकलर सिस्टम।
4. मानक के अनुसार फायर एक्सटिंग्यूशर।
5. बेटराइजर सिस्टम।

यह की थी टिप्पणी
ऊंचाई के मुताबिक भवन के सैट बैक नहीं छोड़े गए। दो मीटर और 1.25 मीटर चौड़ी बाहरी सीढ़ियां जरूरी हैं। आग बुझाने के लिए प्रशिक्षित स्टाफ 24 घंटे उपलब्ध रखा जाए। (यह जानकारी अग्निशमन विभाग ने दी है)

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