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Exclusive: फिल्मी कहानी से कम नहीं कमला का जीवन, कभी नारी निकेतन, तो कभी रही मानसिक चिकित्सालय में, तीन साल बाद अपने घर पहुंची नेपाल

Tue, 12 Jul 2022 12:07 AM IST
धीरेन्द्र सिंह राजीव वर्मा, एटा
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अपनी बेटी के साथ कमला - फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश के एटा जिले में अपने घर से सैकड़ों किमी दूर कभी जिला अस्पताल, नारी निकेतन तो कभी मानसिक चिकित्सालय का दंश नेपाल की युवती तीन साल तक झेलती रही। परिजन को याद कर रो लेती, लेकिन उन तक पहुंचने का जरिया नहीं मिल पा रहा था। तीन साल बाद जब स्वदेश पहुंची और घर की देहरी पर कदम रखा तो अपनों को देख खुशी के आंसू छलक उठे। 

पिलुआ थाना क्षेत्र में हाईवे पर 8 अप्रैल 2019 की रात में 18 साल की कमला बोहरा सड़क पर घूमते हुए मिली थी। उसकी मानसिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं थी। पुलिस ने उसे जिला अस्पताल पहुंचा दिया। इसके बाद वन स्टॉप सेंटर पर रखा गया। 13 अप्रैल को उसे एसडीएम न्यायालय में पेश किया गया। एसडीएम ने उसे राजकीय महिला शरणालय मथुरा पहुंचाने का आदेश दिया। उसी दिन वहां भेज दिया गया।
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कमला अपनी बेटी के साथ - फोटो : अमर उजाला

बच्ची को दिया जन्म 

उस समय कमला गर्भवती थी। मथुरा नारी निकेतन में 28 नवंबर 2019 को उसने एक बच्ची को जन्म दिया। इसके बाद कमला का मानसिक स्वास्थ्य और बिगड़ता गया। मजबूरन बच्ची को राजकीय बालगृह और कमला को 20 दिसंबर 2019 को आगरा के मानसिक चिकित्सालय पहुंचाया गया। 25 दिसंबर को आगरा से उसे वापस मथुरा भेज दिया गया। मानसिक स्थिति में सुधार आने पर कमला ने बताया कि वह नेपाल के महेंद्रनगर की रहने वाली है।
 
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एनजीओ के सदस्य - फोटो : अमर उजाला

एनजीओ ने किया संपर्क

इस बीच नेपाल के एक एनजीओ किन ने संपर्क कर महिला को वापस नेपाल पहुंचाने की दिशा में पहल शुरू की।  मथुरा के डीपीओ ने 27 दिसंबर 2020 को एटा पत्र भेजा। इस पर डीएम ने कमला को नेपाल भेजने के लिए कार्रवाई करने का आदेश जिला प्रोबेशन विभाग को दिया। बाल संरक्षण अधिकारी सुखवीर सिंह, जिला समन्वयक मिशन शक्ति केंद्र पूजा मिश्रा सहित महिला आरक्षियों की कमेटी गठित की गई जो 8 जुलाई को यहां से रवाना हुई। मथुरा से कमला और उसकी पुत्री को लेकर 9 जुलाई की सुबह उसके नेपाल स्थित घर पहुंचाया।

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कमला अपनी बेटी और एनजीओ की सदस्य के साथ - फोटो : अमर उजाला

गरीब है परिवार, भारत तक पहुंचने की नहीं थी व्यवस्था

कमला का परिवार काफी गरीब है। पिता जीवित नहीं हैं, दो भाई हैं जो मजदूरी करते हैं। गरीबी इतनी ज्यादा है कि पुत्री की जानकारी मिलने के बाद भी उसे लेने के लिए यहां तक पहुंचने की व्यवस्था नहीं कर सके। परिजन के मुताबिक कमला गुस्से में घर से निकल आई थी, जो भटक कर यहां तक आ गई।
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अपने घर नेपाल पहुंची कमला - फोटो : अमर उजाला

सकुशल पहुंचाया गया नेपाल 

डीएम अंकित कुमार अग्रवाल ने बताया कि युवती के नाम-पते का सत्यापन होने के बाद उसे नेपाल भिजवाने की कार्रवाई कराई गई। जिला प्रोबेशन विभाग से टीम भेजकर युवती को कुशलता से पहुंचा दिया गया है।
 
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