शारदीय नवरात्र गुरुवार को चित्रा नक्षत्र से प्रारंभ हो गए हैं। नवरात्र में भौम आदित्य योग, गजकेसरी योग, श्रीवत्स योग और केदार योग होने से भक्तों को आराधना करने से अति शुभ फल प्राप्त होंगे। माता महिषासुर मर्दिनी इस बार डोली पर सवार होकर आएंगी और हाथी पर विदाई होगी। यह सौभाग्य सूचक है। सभी मंगल कार्य बनेंगे और भारतवर्ष में सभी लोगों को उन्नति, वैभव और आयु प्राप्त होगी। ज्योतिषाचार्य पूनम वार्ष्णेय ने बताया कि इस बार तृतीया व चतुर्थी तिथि के शनिवार को होने के कारण नवरात्र आठ दिन के होंगे। नवरात्र के शुभारंभ पर सूर्य, मंगल, बुध, कन्या राशि में और चंद्रमा तुला राशि में गोचर करेंगे। गुरुवार को प्रारंभ होने से आध्यात्मिक उन्नति, साहस, मान-सम्मान, संतोष एवं विजय प्राप्त होंगे। उन्होंने बताया कि नवरात्र में दिव्य शक्ति का प्रादुर्भाव होता है। इसलिए इन दिनों में आद्या शक्ति की उपासना या आराधना का विशेष महत्व है। नव शक्तियां मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री एक महाशक्ति का रूप धारण करती हैं, उसे ही नवरात्र कहा जाता है।