कान्हा की नगरी मथुरा में कई मंदिर हैं। हर मंदिर की अपनी एक अलग विशेषता है। इनमें नरी सेमरी देवी मंदिर अपनी अनोखी परंपरा के लिए जाना जाता है। यहां देवी के दर्शन करने के लिए चैत्र शुक्ल नवमी के दिन सैकड़ों श्रद्धालु तलवार, भाले बल्लम लाठी आदि हथियार लेकर आते हैं और जबरन दर्शन कर प्रसाद लूटने का प्रयास करते हैं। लोग बताते हैं कि पूर्व अनूठी परंपरा सदियों से चली आ रही है।
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नरी सेमरी देवी मंदिर में लट्ठ पूजा
छाता तहसील के नरी सेमरी स्थित देवी मंदिर पर चैत्र नवरात्र में एक बार फिर सदियों पुरानी परंपरा जीवंत हुई। शनिवार को देवी मंदिर में यदुवंशियों ने तड़ातड़ लाठियां बरसाईं। झूला वाले की जय, देवी मैया की जय के जयकारों से मंदिर परिसर गुंजायमान हो गया। मंदिर पर लाठियां बरसते देख पहली बार मेले में आए श्रद्धालुओं भयभीत हो गए। हर कोई आश्चर्यचकित था।
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नरी सेमरी देवी मंदिर में लट्ठ पूजा करते लोग
शनिवार को यदुवंशियों ने परंपरागत रूप से लट्ठों से देवी मां की पूजा की। नरी के ग्रामीण बैंडबाजे पर घोड़ियां नचाते पहुंचे। ग्रामीण उछलते-कूदते देवी मां के जयकारे लगाते पहुंचे। दोपहर तीन बजे सांखी, अलवाई, रहेड़ा के लोग लट्ठ पूजा को पहुंचे। परंपरा के अनुसार देवी पूजन किया गया। लट्ठ पूजा के बाद आमजनों ने देवी मां की आराधना की।
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नरी सेमरी देवी मंदिर
मंदिर के महंत मोहित ठाकुर ने बताया कि गौरे ठाकुर तथा यदुवंशियों के बीच पूजा अर्चना व सीमा विवाद को लेकर झगड़ा हुआ था, जिसमें यदुवंशी विजयी हुए थे। दूसरी ओर गौरे ठाकुरों का कहना है कि इसमें उनकी विजय हुई थी। देवी मंदिर में अनोखी लट्ठ पूजा को देखने के लिए देश-विदेश से देवी भक्त आते हैं।
चैत्र नवरात्र में यहां विशाल मेला भी लगता है। इस बार भी नरी सेमरी मेले में नवमी पर खासी भीड़ उमड़ी। दूर दराज से आए लोगों ने मंदिर परिसर में अपने बच्चों के मुंडन संस्कार कराए। वहीं भक्तों ने यहां स्थित कुंड में स्नान कर आचमन किया। नरी सेमरी मेले में भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था चौकस रही।