आगरा में एसएन मेडिकल कॉलेज के कम्यूनिटी मेडिसिन (सोशल एंड प्रिवेंटिव मेडिसिन) विभाग में नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (एनएफएचएस) के डाटा पर शोध किया गया है। शोध के अनुसार जिले की 25.2 फीसदी महिलाएं और 23.1 फीसदी पुरुष मोटापे और अधिक वजन के शिकार हैं। अधिक वजन और मोटापे से लोग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। 15 से 49 वर्ष की युवतियों व महिलाओं व 15 से 44 वर्ष के युवकों व पुरुषों पर सर्वे किया गया है।
यह शोध कम्युनिटी मेडिसिन की विभागाध्यक्ष डॉ. रेनू अग्रवाल, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. गीतू सिंह ने किया। डाटा का विश्लेषण सीनियर रेजीडेंट डॉ. आरती वर्मा व डॉ. नीलिका त्रिपाठी ने किया है। डॉ. गीतू सिंह के मुताबिक एनएफएचएस-5 (वर्ष 2019-21) के मुताबिक आगरा में ग्रामीण क्षेत्र की अपेक्षा शहरी महिलाओं और पुरुषों में मोटा व वजन बढ़ने की समस्या अपेक्षाकृत काफी अधिक है। महिलाओं की बात की जाए तो ग्रामीण क्षेत्र की 18.9 फीसदी तो शहरी क्षेत्र की 28.8 फीसदी महिलाओं में मोटापा या अधिक वजन है। पुरुषों में ग्रामीण क्षेत्र में 19.42 तो शहरी क्षेत्र में 30.8 फीसदी में मोटापा और वजन अधिक होने की समस्या है। बॉडी मास इंडेक्स के अनुसार मोटापा व वजन (बीएमआई) देखा गया।
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मोटापा
- फोटो : अमर उजाला
शहर में तेजी से मोटे हो रहे पुरुष, महिलाओं ने नियंत्रण किया
डॉ. रेनू अग्रवाल ने बताया कि लोगों में मोटापे व वजन बढ़ने की समस्या तेजी से बढ़ रही है। एनएफएचएस-5 (वर्ष 2015-16) की रिपोर्ट के मुताबिक आगरा में महिलाओं में मोटापा 21.5 फीसदी और पुरुषों में 18.8 फीसदी था, जो कि वर्ष 2019-21 के सर्वे में क्रमश: 3.7 फीसदी और 4.2 फीसदी बढ़ा है। शहरी पुरुष तेजी से मोटे हो रहे हैं। पांच वर्षों में आगरा में पुरुषों में वजन अधिक होने की समस्या 8.2 फीसदी बढ़ी है। वर्ष 2015-16 में 22.6 फीसदी पुरुष ही अधिक वजन वाले थे। जबकि शहरी महिलाओं ने मोटापा व वजन बढ़ने पर अपेक्षाकृत नियंत्रण किया है। 2015-16 में 30.5 फीसदी महिलाओं में समस्या थी, वर्ष 2019-21 में 1.7 फीसदी की कमी आई है।
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मोटापा
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हर दूसरा व्यक्ति कमर के मोटापे वाला
डॉ. गीतू सिंह ने बताया कि एनएफएचएस -5 में पहली बार कमर के मोटापे (वेस्ट, हिप, रेशियो या सेंट्रल ओबेसिटी) का सर्वे किया। देश में हर दूसरा व्यक्ति इस समस्या से ग्रसित मिला। महिलाओं में शहरी क्षेत्र में 61.7 फीसदी, ग्रामीण क्षेत्र में 55.2 फीसदी, पुरुषों में शहरी क्षेत्र में 56.2 फीसदी, ग्रामीण क्षेत्र में 50.6 फीसदी में कमर का मोटापा पाया गया। देश के सभी राज्यों के करीब 23 लाख लोगों पर सर्वे किया गया।
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मोटापा
बीमारियों का खतरा अधिक
अधिक वजन व मोटापा वाले व्यक्ति हाई रिस्क वाले होते हैं। उन्हें हृदयाघात, डायबिटीज, स्ट्रोक, कैंसर, घुटनों की परेशानी, फेफड़े व लीवर की बीमारी की आशंका रहती है। महिलाओं में समस्या होने पर बच्चों को दिक्कतें आती हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक मोटापा व वजन बढ़ने से बचने के लिए खानपान व दिनचर्या को व्यवस्थित रखने की जरूरत है। बच्चों और युवाओं को फास्टफूड खाने से बचना चाहिए। खेलकूद व अन्य शारीरिक गतिविधियों पर जोर देना चाहिए। कामकाजी लोगों को भी उचित खानपान के साथ व्यायाम करने समय पर सोने और जगने पर ध्यान देना चाहिए। महिलाओं में प्रत्येक गर्भधारण के बाद वजन बढ़ता है। शारीरिक श्रम पर ध्यान देना चाहिए।