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राष्ट्रीय पुस्तक मेला: आगरा कॉलेज के खेल मैदान पर सजा तीन लाख किताबों का संसार

Sat, 12 Oct 2019 01:14 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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पुस्तक मेला में छात्राएं - फोटो : अमर उजाला
आगरा कॉलेज के खेल मैदान पर आगरा साहित्य उत्सव 2019 एवं राष्ट्रीय पुस्तक मेला का आगाज शुक्रवार को हुआ। प्रदेश के लघु उद्योग राज्य मंत्री चौधरी उदयभान सिंह ने कहा कि पठन-पाठन कठिन दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में साहित्य की उपासना व उसे संजोना तपस्या के समान है। संस्कृति और पहचान को संजोने का काम सिर्फ साहित्य कर सकता है। मेले में 65 स्टॉल पर लगभग तीन लाख किताबें मौजूद हैं।
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पुस्तक मेला के उद्घाटन समारोह में नृत्य करते कलाकार - फोटो : अमर उजाला
उद्घाटन समारोह में संस्कार भारती के राष्ट्रीय संरक्षक पद्मश्री योगेंद्र दा ने कहा कि पुस्तक हमारी जीवन संस्कृति का ज्ञान कराती है। केंद्रीय हिंदी निदेशालय, दिल्ली के निदेशक अवनीश कुमार ने कहा कि पर्यटन स्थल पर साहित्य उत्सव का आयोजन सराहनीय प्रयास है। 
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पुस्तक मेला में छात्राएं - फोटो : अमर उजाला
नेशनल बुक ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रोफेसर गोविंद शर्मा ने कहा कि किताबों के प्रति रुझान कम नहीं हुआ है। पुस्तक लेखन का विस्तार हुआ है। नए-नए विषय आ गए हैं। इससे पहले मुख्य संयोजक डॉ. अमी आधार निडर ने अतिथियों का स्वागत किया। श्याम सुंदर शर्मा, प्रील्यूड स्कूल के निदेशक सुशील गुप्ता, सेंट एंड्रूज स्कूल के निदेशक गिरधर शर्मा ने भी विचार व्यक्त किए। 

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पेंटिंग प्रतियोगिता का हुआ आयोजन - फोटो : अमर उजाला
आगरा लिटरेचर क्लब की ओर से आयोजित आगरा साहित्य उत्सव 2019 में पेंटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। आगरा कालेज में हुई पेंटिंग प्रतियोगिता में तीन से 15 वर्ष तक के 50 स्कूलों के एक हजार से अधिक बच्चों ने प्रतिभाग किया। इसमें सेव द गर्ल्स चाइल्ड, सेव अर्थ जैसे विषयों पर कूची चलाई। 
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पुस्तक मेला में प्रर्दशनी देखते राज्यमंत्री चौ.उदयभान सिंह - फोटो : अमर उजाला
मेले में काशी हिंदू विश्वविद्यालय के सहयोग से डॉ. उत्तमा दीक्षित के निर्देशन में लगाई गई चित्रकला प्रदर्शनी में ब्रज की संस्कृति को समेटे पेंटिग्स के साथ ही सूर के पदों पर आधारित श्रीकृष्ण के मनोहारी चित्रों का प्रदर्शन किया गया है। पहले ही दिन राधा-कृष्ण की पेंटिंग 25 हजार रुपये में खरीदी गई। इधर, डांडिया नाइट में 200 से ज्यादा जोड़ों ने जमकर धमाल मचाया। गुजरात और राजस्थानी संस्कृति का फ्यूजन मंच पर दिखाई दिया। 
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