नंद घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की...हाथी दीने घोड़ा दीने और दीनी पालकी, के जयघोषों के साथ रविवार को नंदोत्सव का आयोजन हुआ। जिसे देखो नंदभवन की ओर दौड़ा चला जा रहा था। हर कोई उपहार लूटने के लिए आतुर था। नंदभवन परिसर को फूलों और गुब्बारों के साथ भव्यता से सजाया गया। घरों में अलग-अलग तरह के स्वादिष्ट व्यंजन बनाए गए। मौका था कान्हा के जन्मोत्सव का।
नंदभवन में भी 56 भोग लगाए गए। कृष्ण बलराम को स्वर्ण रजत पालने में विराजमान किया गया। पारंपरिक वेशभूषा से सुसज्जित हो माथे को केसर कुमकुम आदि के चंदन से सजा कर समाजी नंदभवन पहुंचे। कान्हा और बलराम के चरणों में वंदन कर नंद महोत्सव की तैयारियों में जुट गए। नंद भवन को दुल्हन की तरह सजाया गया। 10 बजे मंदिर परिसर में नंदगांव बरसाना के विप्रों द्वारा सामूहिक समाज गायन का आयोजन किया गया। एक ओर बरसानावासी तथा दूसरी ओर नंदगांववासियों की पंक्ति बनी हुई थी। चराचर को दीर्घायु प्रदान करने में सक्षम नटखट गोपाल के लिए नंदगांव-बरसाना के गोपों ने समाज गायन कर दीर्घायु की कामना की। समाज गायन में आने वाली हे हा हे..... की ध्वनि मौजूद लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही थी।
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नंंद महोत्सव के दौरान होता समाज गायन
- फोटो : अमर उजाला
नंदभवन में समाज गायन के दौरान रानी तेरौ चिर जीवै गोपाल, आजु बधायौ ब्रजराज के, बाजै बधाइयां बे सेइयांनंद के दरबार, आज अनौंखी छवि छटा, छाय रही नंदगाम आदि पदों का गायन किया गया। मंदिर प्रांगण में नंदगांववासियों द्वारा वृषभानु के जमाई की जै और बरसाना के लोगों द्वारा नंद के जमाई की जय के जयघोष गूंजते रहे। नंदोत्सव के दौरान मिठाई, खिलौने, पटुका, फरुआ आदि लुटाए गए। मंदिर प्रांगण में ही प्रतीकात्मक मल्ल युद्ध का प्रदर्शन किया। नंद महोत्सव में बांस बधाई और शंकर लीला का आयोजन भी किया गया।
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नंदभवन में लीला मंचन
- फोटो : अमर उजाला
कृष्ण जन्म की खबर सुनते ही देवता भी दर्शनों को लालायित होने लगे। ब्रह्मा और ब्रह्माणी भी ढांढ़ी-ढांढ़िन का वेष रखकर भगवान के दर्शनों के लिए आए। नंद भवन में पहुंच कर नंदबाबा को उसकी वंशावली का वर्णन किया।
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नंदभवन, नंदगांव
- फोटो : अमर उजाला
बांस बधायी का भी आयोजन किया गया। इसी प्रकार भगवान शिव भी लाला के दर्शनों की इच्छा से नंदगांव आए। उनके भयंकर रूप को देखकर माता यशोदा ने उनको दर्शन नहीं कराए। अंत में लाला के रुदन को देखकर माता ने शंकर जी को दर्शन कराए और विनती की।
बाबा आप यहीं नंदीश्वर पर्वत पर विराजमान हो जाओ और मेरे लाला को जब भी नजर लगे तो इसी तरह राई नौन कर के नजर उतारना। लाला के दर्शन पाकर भोले नाथ द्रवीभूत हो गए। इसी प्रकार अन्य देवी-देवता भी आदि का रूप धारण कर लीला पुरुषोत्तम के दर्शनों के लिए आए।