शहर के 100 में से 52 वार्डों के 99,450 घरों में बुधवार से जब भी कूड़ा उठाया जाएगा तो घर के मालिक के मोबाइल पर मैसेज आएगा कि कूड़ा उठाया जा चुका है। घर से कूड़ा उठाने गई टीम गेट पर लगे आरएफआईडी टैग को रेडियो फ्रीक्वेंसी रीडर से स्कैन करेगी। स्कैन करते ही एक मैसेज मोबाइल पर और दूसरा नगर निगम के मोबाइल एप पर आ जाएगा।
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निगम ने आरएफआईडी रीडर सेनेटरी सुपरवाइजरों को बांटे
- फोटो : अमर उजाला
नगर निगम ने सेनेटरी इंस्पेक्टर और कर्मचारियों को 305 आरएफआईडी रीडर बांटे हैं, जिनका इस्तेमाल बुधवार से शुरू हुआ। इससे डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन में हो रही गड़बड़ी नहीं हो सकेगी। नगर आयुक्त अरुण प्रकाश ने अपर नगर आयुक्त केबी सिंह, पर्यावरण अभियंता राजीव राठी के साथ नगर निगम सदन कक्ष में सेनेटरी इंस्पेक्टरों, सुपरवाइजरों को आरएफआईडी टैग को स्कैन करने की ट्रेनिंग दी। इसके बाद रीडर टीम को दिए गए। हर रीडर से 800 घरों के टैग स्कैन किए जाएंगे।
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अरुण प्रकाश, नगर आयुक्त
- फोटो : अमर उजाला
हम शहर को डलावघर और डस्टबिन से मुक्त करने जा रहे हैं। घर से कूड़ा उठे, इसलिए तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है। कूड़ा घर से लिया गया या नहीं, इसका ब्योरा अब उपलब्ध होगा। शहर के सभी 3.50 लाख घरों के गेट पर स्मार्ट टैग लगाया जा रहा है, जिसे कूड़ा कलेक्शन के बाद सीवर और गृहकर से भी जोड़ा जाएगा। -अरुण प्रकाश, नगर आयुक्त
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रेडियो फ्रीक्वेंसी टैग को रीडर के जरिए स्कैन करने की प्रक्रिया समझाते हुए पर्यावरण अभियंता राजीव राठी
- फोटो : अमर उजाला
स्मार्ट सिटी के तहत घर-घर से कूड़ा एकत्र करने के लिए घर के बाहर आरएफआईडी टैग लगाए जा रहे हैं। पर्यावरण अभियंता राजीव कुमार राठी ने बताया कि यदि यह टैग टूटा तो दोबारा लगवाने के लिए लोगों को 100 रुपये का भुगतान करना होगा। हर श्रेणी के घर, व्यावसायिक भवन के लिए कूड़ा उठाने की दर तय है।
दिवाली के बाद गीले कूड़े की प्रोसेसिंग कर खाद बनाने वाला 300 मीट्रिक टन क्षमता का एक और प्लांट शुरू कर दिया जाएगा। कुबेरपुर लैंडफिल साइट पर बन चुके इस प्लांट के बाद घर से जो कूड़ा एकत्र किया जाएगा वह शहर में मौजूद ट्रांसफर स्टेशनों से सीधे कुबेरपुर पहुंचाया जाएगा। नगर आयुक्त अरुण प्रकाश के मुताबिक छह जगहों पर सूखे कूड़े की प्रोसेसिंग हो रही है, जबकि चार जगह 35 मीट्रिक टन गीले कूड़े से खाद बनाई जा रही है।