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मोहर्रम: करबला के शहीदों की याद में पढ़े कलाम, इमामबाड़ों से निकाले गए अलम के जुलूस

Tue, 10 Sep 2019 12:15 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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फूलों के ताजिये पर सेल्फी लेते अकीदतमंद - फोटो : अमर उजाला
पाय चौकी स्थित ऐतिहासिक फूलों के ताजिये पर जायरीन ने जियारत शुरू कर दी। लोगों ने गुलाबजल, फूल चढ़ाए। शहर के विभिन्न इलाकों से शाम से ही अकीदतमंदों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया, जो कि देर रात तक चलता रहा। इस दौरान पाय चौकी क्षेत्र में करबला की झांकियां भी सजाई गई हैं।

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tazia - फोटो : अमर उजाला
शाहगंज के इमामबाड़ा वक्फ मीर नियाज अली से मोहर्रम की आठवीं को हजरत अब्बास के अलम का जुलूस निकाला गया। युवाओं ने सीनाजनी करते हुए अब्बास को याद किया। रविवार को अलम की जियारत के बाद जुलूस निकाला गया।
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tazia - फोटो : अमर उजाला
सनी रिजवी ने नौहाख्वानी की।संचालन अली कैसर ने किया। इसके पहले  मजलिस में मौलाना अली मंसब रिजवी ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने अपनी शहादत से पहले बादशाह यजीद से हिंदुस्तान जाने की ख्वाहिश जाहिर की। हजरत इमाम जानते थे कि हिंदुस्तान अमन पसंद लोगों का देश है। इस मौके पर सैयद जफर रिजवी, सैयद रजा रिजवी, इकरान रजा, जफर काजमी, नजफ रिजवी, फैजी रिजवी, साहिल रजा आदि थे। इसके
अलावा अन्य इमामबाड़ों से भी अलम के जुलूस निकाले गए।

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दरगाह मरकज साबरी - फोटो : अमर उजाला
दरगाह मरकज साबरी में मोहर्रम की आठवीं तारीख पर मसालमे का आयोजन किया गया। सज्जादानशीन रमजान अली शाह ने कहा कि हजरत अब्बास ने करबला के मैदान में तमाम जख्म सहते हुए पानी की खिदमत को अंजाम दिया और शहीद हो गए। उन्होंने 72 साथियों की याद में हक का दामन नहीं छोड़ा। इसके बाद शायरों ने करबला के शहीदों को अपने सलाम पेश किए।
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मोहर्रम का जुलूस (फाइल फोटो)
पाय चौकी पर रखे जाने वाला ऐतिहासिक फूलों का ताजिया पर जियारत करने पूरे शहर के लोग आते हैं। इसके अलावा मुस्लिम बस्तियों में भी लोग ताजिए रखते हैं।  दूसरी ओर, शिया समुदाय के इमामबाड़ों में मोहर्रम की मजलिसें चलीं।
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