आगरा के सॉफ्टवेयर इंजीनियर दीपक मखीजा का शव सोमवार को शाम छह बजे आवास विकास कॉलोनी के घर पर पहुंचा तो परिवार में कोहराम मच गया। मां ने आखिरी बार जमीन पर निढाल पड़े अपने लाल का चेहरा देखा तो मानो उनका कलेजा ही फट पड़ा। वह चीखते हुए बेहोश हो गईं। दादा-दादी बेहाल हो गए। वहां मौजूद हर शख्स की आंखें छलक उठीं। रिश्तेदार और कॉलोनी के लोगों ने परिवार को ढांढस बंधाकर संभाला।
दीपक मखीजा आवास विकास कॉलोनी के सेक्टर चार के निवासी थे। बेंगलुरू की बहुराष्ट्रीय कंपनी में नौकरी करते थे। 31 दिसंबर को नए साल का जश्न मनाने पुडुचेरी गए थे। नहाते समय समुद्र में डूब गए। खबर सुनकर पिता तुलसीराम और भाई विक्की पुडुचेरी के लिए रवाना हुए थे। वहां घटना के 18 घंटे बाद शव मिला। लहरों की वजह से शव काफी दूर पहुंच गया था। विक्की पुलिस के साथ मोटर बोट से गया था।