एससी-एसटी एक्ट में किए गए बदलाव के खिलाफ ताजनगरी में दलित वर्ग के हजारों लोग सोमवार सुबह सड़कों पर उतर आए। उन्होंने ऐसा कोहराम मचाया कि शहर जल उठा। जगह-जगह आगजनी, तोड़फोड़ की, पुलिस पर पथराव किया, दुकानों में लूटपाट की गई। पुलिस ने हालात पर काबू करने की कोशिश की लेकिन देर रात तक स्थिति नियंत्रण में नहीं आ पाई।
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उपद्रवियों ने कई जगह लगाई आग
- फोटो : अमर उजाला
धाकरान से बवाल की शुरुआत हुई। यहां तीन होटलों में तोड़फोड़ की गई। टेढ़ी बगिया पर हाईवे जाम किया गया। यहां एक होटल में लूटपाट की गई। सबसे ज्यादा बवाल एमजी रोड पर हुआ। रावली पर आंसू गैस के गोले चलाकर, लाठीचार्ज करके, रबर बुलेट से फायर करके और खुद भी पत्थर चलाने के बावजूद पुलिस हालात पर काबू नहीं कर पाई। हर दस मिनट पर उपद्रवी पथराव करते रहे। मधु नगर में भी यही स्थिति रही।
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उपद्रवियों पर लाठीचार्ज करती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
रावली पुल के ऊपर उपद्रवियों ने स्कूटी से जा रहे भाई-बहन को रोक लिया। युवती को खींचने की कोशिश की। वह जोर से चीखी। एसएसपी अमित पाठक पास में ही थे। चीख उनके कानों तक पहुंची। वह दौड़ लिए। पुलिस ने उपद्रवियों को खदेड़ा। एसएसपी ने युवती को बचाया। उससे कहा कि वह घबराए नहीं, पुलिस उसे घर तक छोड़कर आएगी। उसने कहा कि वह घर नहीं, परीक्षा देने कॉलेज जा रही है। एसएसपी ने पुलिस से कहा कि उसे सुरक्षित पहुंचाया जाए। इसके बाद उसे पुलिस सुरक्षा में ले जाया गया।
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उपद्रवियों ने स्कूली बस में लगाई आग
- फोटो : अमर उजाला
उपद्रवियों ने सबसे ज्यादा बवाल किया रावली पर। यहां स्टेट बैंक तिराहा और रावली पुल के दोनों ओर की गलियों से पथराव किया। यहां पर पुल के पास स्कूल बस में आग लगा दी गई। बुंदू कटरा पुलिस चौकी भी फूंक दी। रोहता नहर पर शाम को तीन बसों में तोड़फोड़ की। यूपी-100 की जीप भी क्षतिग्रस्त कर दी।
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उपद्रवियों को काबू करती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
धाकरान पर उपद्रवियों में शामिल कुछ लोगों ने दुकानदारों को पीटा और उनका गल्ला लूट लिया। दुकानों में तोड़फोड़ भी की। यह देखकर दुकानदार दहशत में आ गए। धाकरान निवासी सोन धाकड़ ने बताया कि उप्रदवियों ने पार्षद ओमप्रकाश के भाई की पत्नी शमला देवी की ठेल से सामान लूटने के बाद रामश्याम भंडार में दुकानदार को पीटा। इसके बाद सामान लूट लिया। इसके बाद स्टेशनरी की दुकान में भी लूट की कोशिश की।
धाकरान पर प्राचीन मंदिर बना हुआ है। जिस समय पथराव हुआ, वहां पर महंत सुंदरदास बैठे हुए थे। एक पत्थर मंदिर में भी आ गया। इस पर महंत ने गेट बंद कर लिया। मंदिर के चारों ओर लोहे की जाली लगी है। इससे बचाव हो गया। ईंट-पत्थर जाली लगी होने के कारण अंदर नहीं आ सके।