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श्री पारस अस्पताल प्रकरण: मॉकड्रिल से तीन दिन पहले जताई थी ऑक्सीजन संकट पर चिंता, फिर भी नहीं लिया संज्ञान

Tue, 29 Jun 2021 10:50 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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श्री पारस अस्पताल की मॉकड्रिल से पहले राज्यमंत्री डॉ. जीएस धर्मेश ने की थी सर्किट हाउस में मीटिंग - फोटो : अमर उजाला
आगरा के श्री पारस अस्पताल में दमघोंटू मॉकड्रिल कांड से तीन दिन पहले सर्किट हाउस में ऑक्सीजन संकट को लेकर जनप्रतिनिधियों ने चिंता जताई थी। सभी के लिए ऑक्सीजन, बेड व उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश जिलाधिकारी व मुख्य चिकित्सा अधिकारी को दिए थे। उस समय दूसरी लहर में संक्रमण चरम पर था। अस्पतालों में बेड से लेकर ऑक्सीजन के लिए हाहाकार मच रहा था। बैठक में प्रशासन से ऑक्सीजन मिलने में आ रही दिक्कतों को बताया। साथ ही अस्पतालों में मरीजों की भर्ती के लिए सीएमओ को निर्देशित किया। उस समय कोविड अस्पतालों में ऑक्सीजन आपूर्ति मोदी नगर व गैर जिलों से आ रहे टैंकर पर निर्भर थी। टेढ़ी बगिया प्लांट चालू नहीं हो सका था। सिकंदरा प्लांट से सीमित मात्रा में सिलिंडर की रीफिलिंग हो रही थी। ऐसे में फिर जिला प्रशासन के उस दावे पर सवाल खड़े हो गए हैं जिसमें प्रशासन ने ऑक्सीजन की पर्याप्त उपलब्धता की बात कही है। 26 अप्रैल की सुबह श्रीपारस अस्पताल में पांच मिनट की मॉकड्रिल की गई। कथित 22 मरीजों की मौत के आरोप लगे। जांच रिपोर्ट में 16 मृतकों की पुष्टि हो चुकी है। जांच रिपोर्ट में प्रशासन ने 16 मरीजों की मौत ऑक्सीजन कमी के कारण नहीं मानी है। 
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श्री पारस अस्पताल आगरा - फोटो : अमर उजाला
ये खड़े हुए सवाल
- ऑक्सीजन कमी नहीं थी तो जनप्रितिनिधियों ने चिंता क्यों जताई।
- कोविड अस्पतालों ने गेट पर नो ऑक्सीजन के नोटिस क्यों लगाए।
- ऑक्सीजन कमी का हवाला देते हुए मरीजों को भर्ती क्यों नहीं किया।
- ऑक्सीजन प्लांट पर रात-रातभर तीमारदारों की लाइन क्यों लगी थीं।
- ऑक्सीजन सिलिंडर के लिए प्लांट पर छीना-झपटी क्यों की गई। 
- अस्पतालों में ऑक्सीजन ऑडिट कराने का निर्णय क्यों लिया गया।
 
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रेनू सिंघल अपने पति की तस्वीर के साथ - फोटो : अमर उजाला
पीड़ित बोले...ऑक्सीजन ने छीना लिया मेरा सुहाग
23 अप्रैल को पूरे शहर में ऑक्सीजन नहीं मिली। मैं पति को लेकर अस्पतालों के बाहर गिड़गिड़ाती रही लेकिन किसी ने ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं कराई। इमरजेंसी ले गई वहां मेरे पति की मृत्यु हो गई। मैंने अपने मुंह से उन्हें सांसें दीं। लेकिन किसी ने कोई मदद नहीं की। मुझे अपनी जान से ज्यादा पति प्यारा था। मैं उन्हें लाख कोशिशों के बावजूद बचा नहीं पाई। ऑक्सीजन संकट ने मेरा सुहाग छीन लिया। - रेनू सिंघल, आवास विकास कॉलोनी
 

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श्री पारस अस्पताल: मुख्य दरवाजे पर तैनात पुलिसकर्मी - फोटो : अमर उजाला
25 से 30 तक रहा बहुत बुरा हाल
25 से 30 अप्रैल तक बहुत बुरा हाल था। बेड, ऑक्सीजन की भारी कमी थी। प्रशासन झूठ बोल रहा है कि ऑक्सीजन पर्याप्त थी। मेरा पूरा परिवार संक्रमित था। मैं ऑक्सीजन के लिए रात-रातभर प्लांट के बाहर खड़ा रहा। मेरी दादी की ऑक्सीजन कमी से मृत्यु हो गई। उस समय कोई सुनवाई नहीं हो रही थी। ऑक्सीजन के लिए हाहाकार मचा था। तब मैंने डीएम साहब से लेकर कंट्रोल रूम पर कई फोन किए। कोई मदद नहीं मिली। यह कहना है ऑक्सीजन पर्याप्त थी बिल्कुल गलत है। - अतुल मित्तल, आलोक नगर
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श्री पारस अस्पताल के गेट पर प्रशासन ने चस्पा किया नोटिस - फोटो : अमर उजाला
मेरे पति को जबरन किया था डिस्चार्ज
26 अप्रैल को ऑक्सीजन की इतनी कमी थी कि मेरे पति को रामबाग स्थित जेडी अस्पताल ने डिस्चार्ज कर दिया था। मैं भी संक्रमित थी। ऑक्सीजन कहीं मिल नहीं रही थी। दयालबाग स्थित गोदाम में मेरा भतीजा गया तो उसने बताया कि ऑक्सीजन नहीं है। मेरे पति को अस्पताल से घर भेज दिया गया। 10 दिन उनका घर पर उपचार किया। तब जाकर वो ठीक हो सके। मैंने तब ऑक्सीजन के लिए एडीएम सिटी से लेकर अस्पतालों से मदद मांगी, लेकिन सहायता नहीं मिली। - पायल डाबर, कमला नगर
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पारस अस्पताल - फोटो : अमर उजाला
हाईकोर्ट में दायर करूंगा वाद
श्री पारस अस्पताल में क्या हुआ था इसकी शिकायत मैंने वीडियो वायरल होने से 17 दिन पहले ही एसएसपी को भेजी थी। पुलिस ने जांच नहीं की। जांच होती तो इतनी मौतें नहीं होती। 27 अप्रैल को मेरे 30 वर्षीय बहनोई की मौत ऑक्सीजन कमी से हुई। मैंने एडीएम सिटी से लेकर पुलिस थाने तक बयान दर्ज कराए। अस्पताल संचालक के विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं हुई। प्रशासन ने जांच में उसे क्लीनचिट दे दी। मुख्यमंत्री पोर्टल पर भी शिकायत भेजी थी। अब मैंने हाईकोर्ट में वाद दायर करने का निर्णय लिया है। फाइल तैयार है। अगले सप्ताह इलाहाबाद जाऊंगा। - राजू सिंह यादव, भर्थना, इटावा

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