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जोधपुर झाल: प्रकृति की गोद में पक्षियों की अठखेलियों का नया ठिकाना, देखें खूबसूरत तस्वीरें

Tue, 28 Jul 2020 12:16 AM IST
मुकेश कुमार ओम प्रकाश शर्मा, फरह (मथुरा)
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जोधपुर झाल में पक्षी - फोटो : अमर उजाला
आगरा और मथुरा जिले की सीमा पर फरह ब्लॉक की ग्राम पंचायत कौह के मौजा जोधपुर के लगभग 125 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला झाल पक्षियों के कलरव और अठखेलियों का नया ठिकाना बन गया है। कीठम सूर सरोवर के पास जोधपुर झाल में रंगे-बिरंगे पक्षी और तितलियों ने लोगों को आकर्षित करना शुरू कर दिया है। हालांकि एक साल पहले इस झाल को तैयार करने में ताकत झोंकने वाले मथुरा जिला प्रशासन ने इस बार वन महोत्सव के दौरान यहां वृक्षारोपण की सुध नहीं ली थी।
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कीठम की झील में प्रवासी पक्षी - फोटो : अमर उजाला
कीठम झील के निकट जोधपुर झाल मथुरा जनपद के लिए पर्यटन का एक नया स्थल बनने जा रहा है। इसी दृष्टि से प्रशासनिक मशीनरी ने पिछले साल यहां बड़े स्तर पर काम किया। नतीजा यह सामने आया कि जोधपुर झाल में रंग-बिरंगे पक्षी और तितलियों का एक नया ठिकाना बन गया। वर्तमान में कई पक्षियों की प्रजातियों द्वारा यहां प्रजनन किया जा रहा है। 
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जोधपुर झाल में पक्षी - फोटो : अमर उजाला
पक्षियों पर काम करने वाले विशेषज्ञ इस स्थल को अब कीठम और भरतपुर केवलादेव पार्क के रूप में देख रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार जोधपुर झाल और आसपास की जगह को बड़े पक्षी विहार के रूप में विकसित किया जा सकता है। जोधपुर झाल का अध्ययन कर शोधपत्र प्रकाशित कर रहे डॉ. केपी सिंह ने बताया कि सर्दियों, गर्मियों व मानसून के समय यहां पक्षी माइग्रेशन करके पहुंचते हैं।

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कीठम झील के पास है जोधपुर झाल - फोटो : अमर उजाला
जैव विविधता का भंडार है जोधपुर झाल
बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डेवलपमेंट सोसायटी के सदस्यों द्वारा यहां की जैव विविधता का अध्ययन किया जा रहा है। इस अध्ययन में सामने आया है कि छोटे पक्षियों की लगभग 80 प्रजातियों की पहचान यहां हो चुकी है। प्रवासी पक्षियों के साथ यहां सभी प्रजातियों के पक्षियों की संख्या 125 से अधिक है। अगर इस स्थल का संरक्षण किया जाए तो यह संख्या 200 को पार कर सकती है।
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जोधपुर झाल बना परिंदों का ठिकाना - फोटो : अमर उजाला
मथुरा व आगरा के लिए बना आकर्षण का केंद्र 
पक्षी विशेषज्ञ डॉ. केपी सिंह बताते हैं कि यहां के वेटलैंड, वाटर बॉडी, ड्राई लैंड, ग्रास लैंड, प्लांट श्रव हैबिटेट और बहते पानी के हैबिटेट होने के कारण बगुला, सारस व अन्य विभिन्न प्रजातियों के पक्षी मौजूद हैं। यहां घास की प्रजातियों में टाइफा ओरियेन्टेलिस (सरकंडा), सेचूरम बेंगलेंस, सेचुरम मुंजा, व्हाइट ग्रास बहुत अधिक मात्रा में है। फीनिक्स डैक्टाइलिफेरा (खजूर), हींस व पीलू की अधिक संख्या व चारों तरफ बिछा नहरों का जाल व कम गहरे व साफ पानी की झील भी इस हैबिटेट को विशेषता प्रदान कर रही है। झाल के आसपास के खेत इस हैबिटेट का विस्तार करते हैं। 125 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्रफल का इस तरह का आकर्षक हैबिटेट मथुरा व आगरा के लिए आकर्षण का केंद्र है।
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