सब जग होरी ब्रज में होरा की कहावत यूं ही नहीं है। ब्रज में होली का अद्भुत आनंद है। यहां जितने दिन की होली होती है, उतने ही होली के रूप व रंग देखने को मिलते हैं। इस 40 दिवसीय उत्सव में कहीं लड्डू और फूलों की होली होती है तो कहीं लाठियों से रंग बरसता है। कपड़े फाड़कर कोड़ों की बरसात के साथ मंदिरों में रसिया गायन के बीच अबीर-गुलाल की सतरंगी छटा देखते ही बनती है। होली के इस अद्भुत रूप व रंग के दर्शन के लिए देश ही नहीं विदेशों से भी कृष्ण भक्त यहां आने शुरू हो चुके हैं।
ब्रज मंडल में होली के त्योहार की शुरूआत वसंत पंचमी से हो चुकी है। मंदिरों में फाग की धमारों के बीच अब अबीर-गुलाल उड़ने लगा है। ब्रज की होली नंदगांव-बरसाना से अपने यौवन पर आती है। यहां लाठियों से बरसा रंग और अबीर-गुलाल के सतरंगी बादल होली के रूप में देश में छाने लगते हैं। यहां होली के अद्भुत रंग में सराबोर होने के लिए देशभर से लोगों का आना शुरू हो गया है।