असम राइफल्स के जवान वीरेंद्र सिंह का ड्यूटी के दौरान कई बार उग्रवादियों से आमना सामना हो चुका है। चार साल पहले हुए हमले के वक्त उन्होंने उग्रवादियों को करारा जवाब दिया था। उस समय एक गोली उनके सिर को छूकर निकल गई थी।
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शहीद के परिवार को तिरंगा सौंपते सेना के अधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
शहीद वीरेंद्र सिंह यादव के सबसे छोटे बेटे दीपक यादव ने बताया कि करीब चार साल पहले भी उग्रवादियों ने घात लगाकर हमला किया था। उस वक्त पिता और उनके साथियों ने उग्रवादियों को करारा जवाब दिया था। एक गोली वीरेंद्र सिंह यादव के सिर से रगड़ती हुई निकल गई। उनके सिर में नौ टांके आए थे। इस घटना के बाद से परिवार के लोग चाहते थे कि वह वीआरएस ले लें, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। अस्पताल से छुट्टी मिलने के कुछ समय बाद ही वह ड्यूटी पर वापस लौट गए।
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जवान का फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
पिता के बारे में बताते हुए दीपक की आंखें नम हो गईं। उन्होंने बताया कि पापा एक साल से घर नहीं आए थे। बीते वर्ष वह दिवाली पर घर आए थे। इस बार भी उन्होंने दिवाली घर आने की बात कही थी। उन्होंने वादा किया था कि वह बीस अक्तूबर के आसपास घर आएंगे और इस बार भी दिवाली मिलकर मनाएंगे। उनका यह वादा अधूरा रह गया।
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शहीद वीरेंद्र सिंह यादव का परिवार
- फोटो : अमर उजाला
एक घंटा पहले जाना था परिवार का हालचाल
रविवार को अरुणाचल प्रदेश में उग्रवादी हमले में शहीद हुए वीरेंद्र सिंह यादव ने हमले से एक घंटे पहले पत्नी मुकेश देवी से फोन पर बात की थी। इस बीच उन्होंने घर परिवार का हालचाल लिया। साथ ही दिवाली पर घर आने की बात कही।