पोखरन में चल रहे युद्धाभ्यास के दौरान बैरल फटने से जान गंवाने वाले आगरा के बीएसएफ के जवान सतीश कुमार चाहर (31) का गुरुवार को अंतिम संस्कार किया गया। छोटे भाई संदीप कुमार ने मुखाग्नि दी। इससे पहले जवान के अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भारी भीड़ जुटी। हजारों लोगों ने नम आखों से जवान को अंतिम विदाई दी।
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बीएसएफ सतीश कुमार चाहर के अंतिम दर्शन को उमड़े ग्रामीण
- फोटो : अमर उजाला
सतीश कुमार चाहर की मंगलवार को जैसलमेर के लाठी पोखरन में युद्धाभ्यास के दौरान जान चली गई थी। सुबह सात बजे उनका पार्थिव शरीर लेकर बीएसएफ के इंस्पेक्टर धर्मेंद्र कुमार गांव पहुंचे। पशु हाट स्थल पर पार्थिव शरीर को लोगों के दर्शन के लिए रखा गया। सपूत के अंतिम दर्शन के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। जिलाधिकारी ने परिजनों को 50 लाख रुपये के दो चेक सौंपे। इसमें 35 लाख रुपये का चेक मृतक की पत्नी सोनिया और 15 लाख रुपये का चेक पिता-माता को दिया गया।
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जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने दी श्रद्धांजलि
- फोटो : अमर उजाला
सतीश कुमार को अंतिम विदाई देने के लिए अकोला ही नहीं आसपास के गांवों के लोग भी उमड़ पड़े। सांसद राजकुमार चाहर, जिलाधिकारी प्रभु नारायण सिंह, एसएसपी बबलू कुमार, राज्यमंत्री चौधरी उदयभान सिंह के पुत्र डॉ. संजीव पाल सिंह, पूर्व सांसद चौधरी बाबूलाल, एसपीआरए सत्यजीत गुप्ता ने उनको पुष्पांजलि अर्पित की।
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बीएसएफ जवान को नमन करते डीएम प्रभु एन. सिंह
- फोटो : अमर उजाला
परिवार के एक सदस्य को नौकरी मांग रहे परिजन
सांसद, जिलाधिकारी और एसएसपी से परिजनों ने परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी की मांग की। लोग इस संबंध में बगैर आश्वासन अंतिम संस्कार करने के लिए राजी नहीं हो रहे थे। सांसद राजकुमार की ओर से इस संबंध में आश्वासन मिलने के बाद अंतिम संस्कार के लिए परिजन निकले। 11:20 बजे शव यात्रा शुरू हुई। जो बाजार से होती हुई निर्माणाधीन ग्रामीण स्टेडियम स्थल पर पहुंची। यहां सतीश कुमार का अंतिम संस्कार किया गया।
बीएसएफ के जवान सतीश कुमार चाहर का पार्थिव शरीर आने के बाद पत्नी सोनिया गुमसुम बैठी पति का चेहरा निहारती रहीं। आठ वर्षीय पुत्री आराध्या सतीश के फुफेरे भाई राहुल की गोद में बैठी पापा को देखती रही। पिता क्षेत्रपाल ने तिरंगा लेकर नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। बीएसएफ के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर दिया। सम्मान में फायरिंग करने के बाद शस्त्रों को झुका दिया गया।