जन्माष्टमी का उल्लास छाने लगा है। 23 और 24 अगस्त के उत्सव के लिए बाजार में रौनक अलग ही दिख रही है। मोहन के शृंगार के लिए तमाम चीजें हैं तो झुलाने के लिए एक से बढ़कर एक शानदार हिंडोले उपलब्ध हैं। सौ रुपये से लेकर साढ़े हजार रुपये तक। रावतपाड़ा और लोहार गली बाजार में हर दुकान पर अपना एक विशेष हिंडोला है। एलईडी लाइट लगे और मोतियों और सितारों से सजे हिंडोले की मांग अधिक है।
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रंग-बिरंगे प्लास्टिक के मोती और सितारों से सजे हिंडोले
- फोटो : अमर उजाला
हिंडोले को रंग-बिरंगे प्लास्टिक के मोती और सितारों से सजाया गया है। झूले की सीट पर मयूर (मोर) बना है। झुलाने के लिए मोती पिराई हुई रस्सी है। अन्य सजावट भी की गई है। कीमत सौ रुपये से दो हजार रुपये तक है।
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हिंडोले
- फोटो : अमर उजाला
रंग-बिरंगी एलईडी लाइट लगे इस हिंडोले की मांग भी काफी है। आपको अलग से लाइट लगाने की जरूरत नहीं होगी। कीमत 150 से साढ़े आठ हजार रुपये तक है।
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पोशाक
- फोटो : अमर उजाला
मोरपंख से सजे हुए इस हिंडोले की खास बात है कि इसमें घरों में सामान्य तौर पर उपलब्ध होने वाला सामान लगा है। दुकानदार यश मिश्रा ने दावा किया कि अन्य सामान को बनाने में जो पॉलिथीन, कागज और गत्ता बचा उनसे ये हिंडोले बनाए गए हैं। इनके साथ बाल गोपाल की पोशाक भी हैं। हर हिंडोले के साथ आठ से दस तरह की पोशाक बनाई गई हैं।
जन्माष्टमी पर बाल गोपाल को सजाने के लिए शानदार पोशाकें भी हैं। कढ़ाई वाली पोशाक अधिक पसंद की जा रही हैं। इस बार एक और बदलाव दिखेगा। नंदकिशोर के शृंगार में मुकुट की जगह पगड़ी को ज्यादा पसंद किया जा रहा है। पगड़ी की खरीदारी अधिक हो रही है।