आगरा में कोरोना संकट के बीच ऑक्सीजन की किल्लत से सांसों की डोर टूट रही है। ऐसी-ऐसी घटनाएं हो रही हैं, जो दिल को झकझोर देती हैं। मंगलवार को ऐसी ही एक और घटना सामने आई। सिकंदरा औद्योगिक क्षेत्र में एडवांस गैस रीफिलिंग प्लांट के बाहर एक युवक अपने बीमार बड़े भाई की जिंदगी बचाने को ऑक्सीजन सिलिंडर के लिए घंटों लाइन में खड़ा रहा। उधर, अस्पताल में ऑक्सीजन न मिलने से बड़े भाई ने दम तोड़ दिया। फोन पर इसकी खबर मिलते ही युवक बदहवास होकर गिर पड़ा।
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सिकंदरा स्थित प्लांट के बाहर ऑक्सीजन सिलिंडर भराने के इंतजार में खड़े लोग
- फोटो : अमर उजाला
मंगलवार को दोपहर करीब 12.30 बजे एडवांस गैस रीफिलिंग प्लांट के बाहर दो हजार से अधिक लोग इकट्ठा थे। प्लांट के गेट के सामने खाली सिलिंडर की 500-500 मीटर लंबी दो लाइनें थीं। पास की पीपीई किट पहने स्वास्थ्यकर्मी और तीमारदार खड़े थे। कोई अपने भाई के लिए, कोई मां के लिए तो कोई पिता के लिए सिलिंडर मांग रहा था। राजामंडी निवासी नरेंद्र कुमार गौतम भी इसी लाइन में लगे हुए थे। उन्होंने बताया कि मेरे 59 वर्षीय बड़े भाई सुधीर गौतम के फेफड़ों में पानी भरा है। सांस नहीं ले पा रहे। उनके लिए सिलिंडर लेने आया हूं।
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सिकंदरा स्थित प्लांट के बाहर ऑक्सीजन सिलिंडर भराने के इंतजार में खड़े लोग
- फोटो : अमर उजाला
नरेंद्र कुमार ने बताया कि सुबह 7 बजे से भटक रहा हूं। बात करने के दौरान ही उनकी जेब में रखा मोबाइल बजता है। फोन पर अस्पताल से खबर मिली कि आपके बड़े भाई नहीं रहे। नरेंद्र बदहवास होकर जमीन पर गिर पड़े। वहां खड़े लोगों ने किसी तरह उन्हें उठाया। जैसे ही उन्हें कुछ होश आया, उठे अस्पताल की तरफ दौड़ पड़े। नरेंद्र ने बताया कि सिद्धि विनायक हॉस्पिटल में ऑक्सीजन कमी से मेरे बड़े भाई की मौत हो गई। उन्होंने कहा-प्लांट के गेट पर 12 पुलिसकर्मी खड़े थे। मैंने उनके पैर छूए, हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाया लेकिन मुझे सिलिंडर नहीं मिला।
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ऑक्सीजन सिलिंडर के इंतजार में खड़े लोग
- फोटो : अमर उजाला
रात तीन बजे से लगे लाइन में
सिलिंडर की लाइन में खड़े राजू ने बताया कि मैं सेवला से आया हूं। रात तीन बजे से यहां लाइन में खड़ा हूं। सिलिंडर नहीं मिला। मेरी मां अस्पताल में भर्ती है। यहां पुलिस वाले गाड़ियों में भर-भरकर सिलिंडर ले जा रहे हैं। जनता मर रही है। यहां कई चिकित्सक पीपीई किट पहने मिले, जो अस्पताल के लिए सिलिंडर लेने आए थे। प्लांट के अंदर एसडीएम सदर वीके गुप्ता बैठे थे और बाहर खाली सिलिंडर लिए बेबस तीमारदार खड़े थे। एसडीएम वीके गुप्ता ने कहा-किसी को सिलिंडर नहीं मिलेगा। सिर्फ कोविड अस्पतालों में आपूर्ति की जा रही है।
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ऑक्सीजन मास्क लगाकर अस्पताल की सीढ़ियों पर बैठी मरीज
- फोटो : PTI
समस्या: बेड खाली पर ऑक्सीजन नहीं
रामबाग, ट्रांसयमुना कॉलोनी में श्रीकृष्णा हॉस्पिटल कोविड सेंटर हैं। इसमें 150 बेड हैं, 60 बेड कोविड मरीजों के लिए आरक्षित हैं। हॉस्पिटल संचालक डॉ. अरविंद यादव ने बताया कि मैं तीन दिन से आधे मरीज भर्ती कर रहा हूं। पहले 60 मरीज भर्ती करता था, अब 30 मरीज भर्ती हैं। ऑक्सीजन नहीं मिलने से उपचार मुश्किल हो रहा है। मैं मरीजों को तड़प-तड़प कर मरते हुए नहीं देख सकता।
बाइक पर ऑक्सीजन सिलिंडर लेकर जाता युवक
- फोटो : अमर उजाला
डॉ. अरविंद यादव ने कहा कि ऑक्सीजन सिलिंडर के लिए 14 घंटे मेरा वाहन चालक प्लांट पर पड़ा रहता है। 30 सिलिंडर की जरूरत पर 10 सिलिंडर मिलते हैं। ऐसे हालातों में कोविड सेंटर चलाना बहुत मुश्किल है। अगर दो दिन में ऑक्सीजन आपूर्ति में सुधार नहीं होता तो मुझे मजबूरन हॉस्पिटल ही बंद करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी ऑक्सीजन आपूर्ति सुनिश्चित कराने के लिए दिनरात मेहनत कर रहे हैं। लेकिन उनके मातहत सबको गुमराह करने में जुटे हैं। अधीनस्थ अफसर फोन नहीं उठाते। ऑक्सीजन आपूर्ति को लेकर वे गंभीर नहीं हैं।