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लॉकडाउन: राममंदिर के पत्थर तराशने वालों को रोटियों के लाले, पैदल चलने से पैरों में पड़ गए छाले

Mon, 30 Mar 2020 12:09 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
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पैदल जाते मजदूर - फोटो : अमर उजाला
लॉकडाउन में कारखाने बंद हो गए। आटा-दाल मिल नहीं रहा था, रोटी के लाले थे, इसलिए घर जाना मजबूरी हो गया। बस मिली नहीं, ट्रक चल नहीं रहे थे, इसलिए हजारों लोग पैदल ही निकल पड़े। सिर पर सामान और मन में किसी भी तरह घर पहुंचने का लक्ष्य। कोई अयोध्या से चला है तो कोई दिल्ली से, 100 से 200 किमी तक पैदल चलना पड़ रहा है, पांव में छाले हैं, मगर सफर जारी है। सबकी अपनी-अपनी मजबूरी है। लॉकडाउन में मुसीबत का बोझ लेकर पैदल चल रहे इन लोगों की दास्तां दिल को झकझोरने वाली है।
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राजस्थान के रहने वाले हीरालाल - फोटो : अमर उजाला
अयोध्या से पैदल आगरा पहुंचे राजस्थान के कारीगर हीरालाल
राजस्थान के सवाई माधोपुर के हीरालाल अयोध्या में राम मंदिर के लिए पत्थर तराश रहे थे। उन्होंने बताया कि पूरा परिवार इसी काम में लगा था। लॉकडाउन होते ही काम बंद हो गया। आसपास की दुकानें बंद हो गई। आटा-दाल मिले नहीं, इसलिए घर चल दिए। कहीं ट्रक में बैठे, कहीं ऑटो में, पांच दिन हो गए हैं, 200 किमी. पैदल चलना पड़ा है। आगरा आते-आते पैरों में छाले पड़ गए हैं, रोटी तक मिली नहीं, सिर्फ पानी पी रहे हैं। अब हिम्मत नहीं है, बस अड्डे पर बस का इंतजार करेंगे।
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सुरेश - फोटो : अमर उजाला
अयोध्या में रोटी मिलती तो हम क्यों भटकते
अगर अयोध्या में ही भोजन का इंतजाम हो जाता है तो हम लोगों को यूं क्यों भटकना पड़ता। पांच दिन से परिवार को साथ लेकर दिन रात चल रहे हैं। न नहाए हैं, न खाना मिल रहा है, अब हिम्मत जवाब दे रही है। यह कहना था कि सवाई माधोपुर के ही सुरेश का। वो भी अयोध्या में पत्थर तराशने का काम कर रहा था। अब तो बस प्रभु से यही प्रार्थना है कि किसी भी तरह घर पहुंच जाएं।

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आगरा लॉकडाउन - फोटो : अमर उजाला
हमें घर पहुंचा दे सरकार... बाहर नहीं निकलेंगे
कन्नौज के देवेंद्र पलवल से पैदल चल रहे हैं। मथुरा से निकलते ही चक्कर आने लगे तो सड़क किनारे बैठ गए। थोड़ी देर रुके, पानी पीया और फिर चल दिए। कहते हैं कि सरकार हमारे घर जाने का इंतजाम कर दे, हम किराया भी दे, घर पहुंचकर बाहर भी नहीं निकलेंगे। वहां खाना तो मिल जाएगा।
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आगरा लॉकडाउन - फोटो : अमर उजाला
झांसी के पास टीकमगढ़ के देवेंद्र गुस्से में हैं। मथुरा में बेलदारी करते हैं। काम बंद होने पर पैदल चल दिए। आगरा पहुंचते पहुंचते हिम्मत जवाब दे गई। पूछने पर बोले कि पिछले रविवार को जनता कर्फ्यू वाले दिन से ही खाने के लाले हो गए थे। लगा कि भूखा मरना पड़ेगा, इसलिए घर चल दिए। अगर खाने को इंतजाम हो जाता तो मथुरा में ही रहते।
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वाहन का इंतजार - फोटो : अमर उजाला
लॉकडाउन में दिव्यांगों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। गुजरात में काम करने वाले फतेहपुर निवासी दिलीप और निकेश जब घर को चले तो कोई साधन नहीं मिला। दिल्ली होते हुए शनिवार को एटा तक पहुंचे। दिलीप अपनी पीठ पर दिव्यांग राम को बैठाए थे तो निकेश की पीठ पर कुलदीप थे। दोनों थक गए तो जीटी रोड पर थोड़ा सुस्ताने लगे। इन्हें फतेहपुर तक जाना था। 
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आगरा आईएसबीटी पर भीड़ - फोटो : अमर उजाला
आगरा में पैदल आने और जाने वालों का सिलसिला जारी है। रोडवेज ने शनिवार को फंसे हुए लोगों को घर पहुंचाने के लिए 375 बसें चलाईं, लेकिन यात्री लेकर सिर्फ 75 बसें ही गईं। रविवार को भी यही हाल है। शहर के आईएसबीटी, ईदगाह और आगरा कोर्ट पर रातभर लोगों की भीड़ रही। सुबह भी घर जाने वालों की संख्या कम नहीं हुई है। हाईवे से हर घंटे सैकड़ों लोग पैदल गुजर रहे हैं। 
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ईदगाह बस अड्डे पर भीड़ - फोटो : अमर उजाला
घर भेजने को बसें लगाईं- जिलाधिकारी
सवाल : हजारों लोग सड़कों पर हैं, इन्हें घर भिजवाने के लिए क्या इंतजाम हैं?
जवाब : रोडवेज की बसें लगाई गई हैं। इनसे लोगों को भिजवाया जा रहा है।
सवाल : बसें बहुत कम चली हैं, हजारों लोग अभी भी सड़कों पर बैठे हैं, इनके लिए क्या व्यवस्था है।
जवाब : स्थान चिह्नित किए जा रहे हैं, इनके खाने और ठहरने का इंतजाम किया जाएगा।
- प्रभु एन सिंह, जिलाधिकारी, आगरा
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