राजा मानसिंह की हत्या के दोषी पुलिसकर्मी जीवन के सात से आठ दशक पूरे का चुके हैं। अब उम्रकैद की सजा उनके लिए किसी सदमे से कम नहीं है। इस मामले के दोषी 11 पुलिसकर्मियों को जब गाड़ी से न्यायालय परिसर में लाया गया तो उनके चेहरों की उदासी उनके हालात बयां कर रही थी। सजा सुनाए जाने के बाद जब पुलिसकर्मी उन्हें लेकर गाड़ी तक पहुंचे तो सदमे जैसी घबराहट भी इस दोषियों पर दिखाई दी।
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राजा मान सिंह की हत्या के दोषियों को जेल ले जाती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
हत्याकांड के दोषी 11 पुलिसकर्मियों को जब न्यायालय परिसर में लाया गया तो सुरक्षाकर्मियों ने चारों ओर से उन्हें घेर रखा था। किसी को भी उनके पास भटकने नहीं दिया गया। गाड़ी से उतार कर उन्हें जिला जज के न्यायालय में ले जाया गया। इस दौरान दोषी पुलिसकर्मियों ने किसी से बात नहीं की। न्यायालय परिसर में मौजूद लोगों की निगाहें दोषियों पर टिकी थीं।
तत्कालीन डिप्टी एसपी कान सिंह भाटी कोर्ट ले जाती पुलिस
- फोटो : अमर उजाला
सिर झुकाए सभी दोषी न्यायालय में पहुंचे। सजा सुनाए जाने के बाद दोषी तत्कालीन डिप्टी एसपी कान सिंह भाटी को पुलिसकर्मी जब गाड़ी तक ले जा रहा था तो उनके पैर कई बार लड़खड़ाए, उनके चेहरे के भाव बता रहे थे कि 82 वर्ष की उम्र में उम्रकैद की सजा सदमे से कम नहीं है। इसी तरह 78 वर्षीय तत्कालीन एसएचओ वीरेंद्र सिंह का भी यही हाल था। वीरेंद्र के चेहरे पर भी तनाव साफ दिखाई दे रहा था।
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राजा मान सिंह की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
बता दें भरतपुर के राजा मानसिंह और दो अन्य की हत्या के मामले में मंगलवार को 11 पुलिसकर्मियों को दोषी करार दिया गया था। 21 फरवरी 1985 को हुए इस बहुचर्चित हत्याकांड की सुनवाई के दौरान 1700 तारीखें पड़ीं और 25 जिला जज बदल गए। वर्ष 1990 में यह केस मथुरा जिला जज की अदालत में स्थानांतरित किया गया था। 35 साल बाद 21 जुलाई 2020 (मंगलवार) को राजा मानसिंह हत्याकांड में निर्णय हो सका था। वादी पक्ष के अधिवक्ता नारायन सिंह विप्लवी ने बताया कि अब तक आठ दफा फाइनल बहस हुई और कुल 78 गवाह पेश हुए, जिनमें से 61 गवाह वादी पक्ष ने तो 17 गवाह बचाव पक्ष ने पेश किए।