आगरा जिले के बाह क्षेत्र में चंबल सेंक्च्युरी में घड़ियाल, मगरमच्छ और डॉल्फिन के तेंदुए प्राकृतिक प्रहरी बन गए हैं। चंबल में तेंदुओं की संख्या बढ़ने से घड़ियाल, डॉल्फिन के बच्चों और अंडों के शिकार की घटनाओं में कमी आई है। बाह रेंज में तेंदुओं की संख्या 30 तक हो गई है। वन विभाग के अफसर चंबल में तेंदुओं की आबादी को घड़ियाल संरक्षण के लिए अच्छा मान रहे हैं। उनका कहना है कि तेंदुओं की आबादी बढ़ने से जलीय जीवों के शिकार का खतरा कम हो गया है।
रेंजर आरके सिंह राठौड़ ने बताया कि चंबल नदी के किनारे घड़ियाल, मगरमच्छ के प्रजनन के दौरान ग्रामीणों, शिकारियों के आने से अंडों, बच्चों को नुकसान होता था। अब ग्रामीणों ने उन जगहों पर जाना छोड़ दिया है, जहां तेंदुए नजर आए हैं। इससे घड़ियाल, मगरमच्छ, डॉल्फिन को नुकसान कम हो रहा है। इन क्षेत्रों में पिछले दो साल से शिकार की घटनाएं नहीं हो रही हैं।